नैतिकता की स्विंग

नवभारत टाइम्स

शहर में भारी-भरकम डेटा सेंटर बनाने का फैसला हुआ है। कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बिजली और पानी की समस्या बढ़ेगी। वे सड़क जाम करने की योजना बना रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे विकास का काम बता रहे हैं। लोगों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद है।

data center protest burden on the city in the name of development or a new door to progress
सुबह की सैर पर निकले दो लोगों के बीच एक गरमागरम बहस हुई, जिसमें एक भारी-भरकम डेटा सेंटर के निर्माण को लेकर विरोध जताया गया। मिस्टर ए ने इस बात पर नाराजगी जताई कि रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन और मार्केट असोसिएशन से पूछे बिना ही यह फैसला लिया गया। उन्होंने चिंता जताई कि डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और पानी की खपत करेगा, जिससे बिजली महंगी होगी और पानी की सप्लाई पर भी असर पड़ेगा, जबकि शहर में पानी की सप्लाई पहले से ही सीमित है। दूसरी ओर, श्रीमान क ने इसे विकास का काम बताया और कहा कि इससे सभी लोग आगे बढ़ेंगे। मिस्टर ए ने सुझाव दिया कि ऐसे सेंटर किसी दूसरे राज्य या छोटे कस्बे में बनाए जा सकते हैं, जहां पानी और बिजली की समस्या कम हो। उन्होंने विरोध जताने के लिए सड़क जाम करने की बात कही, लेकिन श्रीमान क ने इसे गलत तरीका बताते हुए अधिकारियों को ज्ञापन देने की सलाह दी। इसी बीच, एक अन्य व्यक्ति बल्लू बाश्शा ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि यह नैतिकता की 'रिवर्स स्विंग' चलती रहेगी, जहां एक जगह समस्या है तो दूसरी जगह स्वागत।

मिस्टर ए ने श्रीमान क की बात का जवाब देते हुए कहा, "भाई साब, न तो हमारी रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन से पूछा, न मार्केट असोसिएशन से, अपने हिसाब से फैसला कर लिया कि हमाारे इधर भारी-भरकम डेटा सेंटर बनाएंगे।" उन्होंने आगे कहा कि यह सेंटर कितनी बिजली चूसेगा, इसका किसी को अंदाजा नहीं है। अगर बिजली महंगी हुई तो इसका बोझ हम पर ही आएगा। इन सेंटरों को ठंडा रखने के लिए बहुत पानी चाहिए होता है। हमारे यहां तो पानी की सप्लाई पहले से ही सुबह-शाम की है। अगर डेटा सेंटर बन गया तो हमारा क्या होगा? उन्होंने श्रीमान क से कुछ पढ़ा-लिखा करने की भी बात कही।
श्रीमान क ने मिस्टर ए को समझाने की कोशिश करते हुए कहा, "लेकिन यह तो विकास का काम है। क्या आप नहीं चाहते कि सभी लोग आगे बढ़ें?" विकास का नाम सुनते ही मिस्टर ए थोड़े नरम पड़े। उन्होंने कहा, "विकास तो होना ही चाहिए। पर ऐसी चीजें दूसरे स्टेट में भी तो बना सकते हैं, कोई गांव-कस्बा हो। वहां पानी-बिजली कम भी हो तो चल जाएगा। इधर तो आफत हो जाएगी।" इसी वजह से उन्होंने सड़क जाम करने की बात कही।

श्रीमान क ने मिस्टर ए को सड़क जाम करने के बजाय एक बेहतर तरीका सुझाया। उन्होंने कहा, "सड़क जाम करना ठीक बात नहीं है। यह लोकतांत्रिक तरीका नहीं है।" उन्होंने यह भी पूछा कि अगर वे ऐसा करते हैं तो शहर में बाहर से आए लोग क्या सोचेंगे। श्रीमान क ने सलाह दी कि वे अधिकारियों को एक ज्ञापन दें। उनका मानना था कि अधिकारी उनकी बात जरूर सुनेंगे।

तभी वहां बदमाश बल्लू बाश्शा की आवाज सुनाई दी। उसने कहा, "दौड़ पूरी कीजिए अंकल। इधर हो तो आफत-उधर हो तो स्वागत, नैतिकता की ये रिवर्स स्विंग तो चलती रहेगी।" बल्लू के इस बयान से यह साफ जाहिर हो रहा था कि वह इस तरह की बातों को आम मानता है, जहां एक जगह किसी चीज का विरोध होता है तो दूसरी जगह उसका स्वागत। यह एक तरह से समाज की दोहरी सोच पर कटाक्ष था।