Employees Who Did Not Provide Property Details Received Salary Now Action Will Be Taken
संपत्ति का ब्योरा न देने वाले कर्मियों को दिया वेतन, अब होगी कार्रवाई!
नवभारत टाइम्स•
मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का ब्योरा नहीं देने वाले कर्मचारियों को फरवरी में वेतन जारी करने वाले आहरण-वितरण अधिकारियों पर अब कार्रवाई होगी। कार्मिक विभाग ने ऐसे अधिकारियों की जानकारी मांगी है। प्रदेश के 47,816 कर्मचारियों ने अपना संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया था। कार्मिक विभाग ऐसे अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की तैयारी कर रहा है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। जिन आहरण-वितरण अधिकारियों (Drawing and Disbursing Officers - DDOs) ने अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर नहीं दिया था, ऐसे कर्मचारियों को भी फरवरी महीने का वेतन जारी कर दिया, अब उन DDOs पर गाज गिर सकती है। कार्मिक विभाग ने सभी विभागों से ऐसे DDOs की जानकारी मांगी है, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन कर ऐसे कर्मचारियों का वेतन जारी किया। यह जानकारी बुधवार तक मांगी गई थी, लेकिन अभी कुछ ही विभागों ने ब्योरा सौंपा है।
कार्मिक विभाग के सूत्रों के मुताबिक, कई विभागों से ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि संपत्ति का ब्योरा जमा न कराने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को भी फरवरी का वेतन मिल गया। इसी के चलते कार्मिक विभाग ने यह कदम उठाया है। विभाग अब उन सभी DDOs का हिसाब-किताब जुटा रहा है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर ऐसे लोगों को वेतन दिया। आगे चलकर इन DDOs के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब पता चलता है कि प्रदेश के कुल 47,816 कर्मचारियों और अधिकारियों ने 31 जनवरी तक अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा जमा ही नहीं कराया था। कार्मिक विभाग ने 2 फरवरी को इस बात की जानकारी दी थी और इसके बाद संपत्ति का ब्योरा जमा करने के लिए पोर्टल को बंद कर दिया गया था। अब कार्मिक विभाग उन सभी DDOs की सूची तैयार कर रहा है जिन्होंने ऐसे कर्मचारियों को वेतन जारी किया, जिन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया।
यह साफ है कि सरकार सरकारी कर्मचारियों के संपत्ति के ब्योरे को लेकर काफी सख्त है। जो अधिकारी या कर्मचारी इस नियम का पालन नहीं करेंगे, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कार्मिक विभाग इस मामले में पूरी गंभीरता से जांच कर रहा है और दोषी पाए जाने वाले DDOs पर कार्रवाई तय है। यह कदम सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।