Last Day Of Saras Aajivika Mela 2026 Live Demonstration Of Handicrafts And Textile Manufacturing
सरस मेले का आज आखिरी दिन
नवभारत टाइम्स•
सरस आजीविका मेला 2026 का आज समापन है। यह मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र निर्माण की विधियों का सजीव प्रदर्शन कर रहा है। हैंडलूम से चादर बनाने की प्रक्रिया भी दिखाई जा रही है। लोग मेले का लाभ उठाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। आज अंतिम दिन है।
सरस आजीविका मेला 2026 का आज, गुरुवार को समापन हो रहा है। गुड़गांव में आयोजित इस मेले में बुधवार को स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र निर्माण की विधियों का सजीव प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। मेले में केवल एक दिन शेष होने के कारण, लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर इसका लाभ उठा रहे हैं। हैंडलूम से चादर बनाने की प्रक्रिया का भी लाइव डेमो दिखाया जा रहा है, जहाँ कारीगर करघे पर आकर्षक और मजबूत चादरें तैयार करते हुए पूरी बुनाई प्रक्रिया समझा रहे हैं।
यह मेला, जो आज समाप्त हो रहा है, लोगों को देश भर के विभिन्न राज्यों से आई स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा बनाई गई पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्रों को देखने और खरीदने का आखिरी मौका दे रहा है। बुधवार को, लाइव डेमो क्षेत्र में खासी भीड़ देखी गई। यहाँ महिलाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिससे आगंतुकों को उनकी मेहनत और हुनर की झलक मिली।मेले में एक खास आकर्षण हैंडलूम से चादर बनाने की प्रक्रिया का सीधा प्रदर्शन था। कारीगर करघे पर किस तरह से सिंगल और डबल बेड के लिए सुंदर और टिकाऊ चादरें बनाते हैं, यह सब देखने को मिला। उन्होंने यह भी बताया कि हैंडलूम कैसे काम करता है। यह जानकारी उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी थी जो बुनाई की कला को समझना चाहते थे।
मेले के समापन में बस कुछ ही घंटे बाकी हैं। इसलिए, अगर आप अब तक इस शानदार मेले का हिस्सा नहीं बन पाए हैं, तो आज आपके पास मौका है। आप यहाँ आकर न केवल खूबसूरत हस्तशिल्प और वस्त्र खरीद सकते हैं, बल्कि उन्हें बनाने की पारंपरिक विधियों को भी करीब से देख सकते हैं। यह मेला स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने और उनकी कला को लोगों तक पहुंचाने का एक बेहतरीन मंच है।