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नवभारत टाइम्स

एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र होने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम नहीं करने दिया जाएगा। इस अंश को हटाने की बात कही जा रही है। भ्रष्टाचार देश की एक बड़ी समस्या है।

ncert book controversy over judiciary remarks chief justice expresses strong displeasure
NCERT की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र होने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, NCERT इस अंश को किताब से हटा सकता है। यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और देश में भ्रष्टाचार की व्यापक समस्या को उजागर करता है।

भ्रष्टाचार भारत के लिए एक गंभीर समस्या बनी हुई है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में 182 देशों में भारत 91वें स्थान पर है। पिछले साल की तुलना में भले ही 5 स्थान का सुधार हुआ हो, लेकिन भ्रष्टाचार आज भी सरकारी योजनाओं को कमजोर कर रहा है और आम लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। हालांकि, जब बात न्यायपालिका की आती है, तो लोगों की उम्मीदें बढ़ जाती हैं।
अदालतें आम आदमी के लिए आखिरी उम्मीद होती हैं, खासकर जब बाकी सब रास्ते बंद हो जाते हैं। लेकिन इस भरोसे के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही की भी उम्मीद की जाती है। कोई भी व्यवस्था खुद से भ्रष्ट नहीं होती, बल्कि उसे चलाने वाले कुछ लोग ही उसे भ्रष्ट बनाते हैं। देश की न्यायिक व्यवस्था को भी ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा है। जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़ा भ्रष्टाचार का मामला पिछले साल मार्च से चल रहा है और अभी तक इसका कोई नतीजा नहीं निकला है। पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी कि रिटायरमेंट के करीब बड़े फैसले देने का चलन बढ़ रहा है। यह भी समझना जरूरी है कि भ्रष्टाचार सिर्फ पैसों का ही नहीं होता।

अदालतें भरोसे का प्रतीक हैं, लेकिन यह भी सच है कि आम आदमी अदालतों के चक्करों से बचना चाहता है। मुकदमे सालों-साल चलते हैं और बहुत खर्चीले होते हैं। देश भर की विभिन्न अदालतों में लगभग 4.9 करोड़ मामले लंबित हैं। जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, न्यायाधीशों के कई पद खाली हैं। इस वजह से न्याय मिलने की रफ्तार बहुत धीमी हो जाती है।

भारतीय न्यायपालिका की एक अच्छी बात यह है कि वह पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खुद पहल करती है। उदाहरण के लिए, पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने पर सहमति जताई थी। इससे न्यायपालिका की गरिमा और बढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट को इस बार भी इसी तरह की पहल करते हुए इस विवाद का हल निकालना चाहिए। इस पूरे मामले से NCERT को भी एक सबक मिलता है कि केवल एक संस्था पर सवाल क्यों उठाया जाए, जबकि भ्रष्टाचार तो देश की एक आम समस्या है।