रात में थाने के सामने से बेखौफ निकलते हैं ओवरलोडेड डंपर

नवभारत टाइम्स

नूंह जिले में ओवरलोडेड डंपरों का आतंक जारी है। पुन्हाना-होडल रोड पर रात के अंधेरे में ये वाहन बेखौफ दौड़ते हैं। बिछौर थाने के सामने से भी ये डंपर बिना रोक-टोक गुजरते हैं। हाल ही में एक व्यक्ति की मौत के बाद भी पुलिस की चुप्पी चिंताजनक है।

overloaded dumpers running fearlessly from in front of the police station suspicion of police collusion
नूंह में ओवरलोडेड डंपर ों का आतंक जारी है। पुलिस के लाख दावों के बावजूद, पुन्हाना-होडल रोड पर ये भारी वाहन बेखौफ दौड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ये डंपर बिछौर थाने के सामने से भी बिना किसी रोक-टोक के गुजर जाते हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाई नहीं करती। सोमवार देर शाम इसी रोड पर एक ओवरलोडेड डंपर की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, फिर भी प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। रात आठ बजे से सुबह तीन बजे तक इस रोड पर ओवरलोडेड डंपरों का तांडव देखने को मिलता है। तीन से चार डंपर एक साथ कतार में चलते हैं। ये डंपर ठेक, जमालगढ़, मानोता जैसे गांवों और राजस्थान से सटे इलाकों से क्रेशर, रोड़ी और अन्य खनिज सामग्री भरकर पलवल, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, मथुरा, आगरा जैसे शहरों तक पहुंचाते हैं। अंधेरा होते ही ये डंपर पुन्हाना में घुस जाते हैं। इतना ही नहीं, रात में बिछौर थाने के सामने से बैरिकेड भी हटा दिए जाते हैं ताकि डंपर आसानी से निकल सकें। पुलिस की इस निष्क्रियता से मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। बिछौर थाना प्रभारी राजीव ने कहा कि ओवरलोडेड वाहनों की विशेष चेकिंग नहीं होती। थाने के सामने से निकलने वाले वाहनों पर पूरा ध्यान दिया जाता है।

यह स्थिति नूंह जिले में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पुलिस प्रशासन भले ही ओवरलोडेड डंपरों पर लगाम कसने का दावा करे, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पुन्हाना-होडल रोड पर इन भारी वाहनों की मनमानी साफ देखी जा सकती है। ये डंपर न सिर्फ नियमों को तोड़ रहे हैं, बल्कि आम लोगों की जान को भी खतरे में डाल रहे हैं। सोमवार को हुई मौत की घटना इसी का ताजा उदाहरण है। इसके बावजूद, पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होना चिंताजनक है।
रात के अंधेरे में, खासकर रात आठ बजे से सुबह तीन बजे तक, पुन्हाना-होडल रोड पर ओवरलोडेड डंपरों का राज चलता है। ये डंपर इतने बड़े होते हैं कि तीन से चार एक साथ कतार में चलते हैं, जिससे सड़क पर चलना खतरनाक हो जाता है। ये डंपर ठेक, जमालगढ़, मानोता जैसे गांवों से और राजस्थान से सटे इलाकों से खनिज सामग्री भरकर दूसरे शहरों में ले जाते हैं। इन डंपरों के कारण सड़कों का भी भारी नुकसान होता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये ओवरलोडेड डंपर बिछौर थाने के सामने से बेखौफ गुजरते हैं। ऐसा लगता है जैसे पुलिस की नजर इन पर पड़ती ही नहीं। कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि रात के समय थाने के सामने से बैरिकेड हटा दिए जाते हैं ताकि डंपर आसानी से निकल सकें। यह सब देखकर लगता है कि कहीं न कहीं पुलिस की मिलीभगत है। जब इस बारे में बिछौर थाना प्रभारी राजीव से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ओवरलोडेड वाहनों की विशेष चेकिंग नहीं की जाती। उन्होंने यह भी कहा कि थाने के सामने से निकलने वाले वाहनों पर पूरा ध्यान दिया जाता है। लेकिन उनकी यह बात जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती।