पानीपत में मजदूरों ने किया पथराव, पुलिस का लाठीचार्ज

नवभारत टाइम्स

पानीपत रिफाइनरी में मजदूरों और पुलिस के बीच झड़प हुई। मजदूरों ने पथराव किया जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। एक व्यक्ति घायल हुआ। प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद मजदूर शांत हुए। इससे पहले भी इसी तरह की घटना हुई थी।

पानीपत में मजदूरों ने किया पथराव, पुलिस का लाठीचार्ज
पानीपत में बुधवार को एक रिफाइनरी के मजदूरों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। मजदूरों ने पहले सड़क जाम कर दिया था। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। जब भीड़ भड़क गई तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान एक मजदूर का हाथ भी टूट गया। मजदूरों की मांग थी कि प्रशासन द्वारा मानी गई 8 घंटे की ड्यूटी जैसी मांगों को पूरी रिफाइनरी में बोर्ड पर लिखा जाए। साथ ही, जो ठेकेदार इन नियमों का पालन न करे, उसके खिलाफ FIR दर्ज कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए। दोपहर तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। बाद में IOCL के अधिकारियों ने लिखित में आश्वासन दिया, जिसके बाद मजदूर शांत हुए।

यह घटना पानीपत की एक रिफाइनरी में हुई। बुधवार को वहां काम करने वाले मजदूरों ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने सड़क पर जाम लगा दिया। पुलिस मौके पर पहुंची और मजदूरों को समझाने की कोशिश की। लेकिन मजदूर अपनी मांगों पर अड़े रहे और पुलिस की बात नहीं मानी।
जब पुलिस की समझाईश काम नहीं आई तो भीड़ बेकाबू हो गई। इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस लाठीचार्ज में एक मजदूर का हाथ भी टूट गया।

मजदूरों का कहना था कि प्रशासन ने उनकी 8 घंटे की ड्यूटी जैसी कई मांगें मान ली थीं। अब उनकी मुख्य मांग थी कि इन सभी मांगों को पूरी रिफाइनरी में एक बोर्ड पर लिखकर लगाया जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जो ठेकेदार इन नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ FIR दर्ज की जाए और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए।

दोपहर तक स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी रही। मजदूरों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा था। लेकिन बाद में IOCL के अधिकारियों ने अपने लेटर पैड पर मजदूरों को लिखित में आश्वासन दिया। इस लिखित आश्वासन के बाद ही मजदूर शांत हुए और जाम खोल दिया।

यह पहली बार नहीं है जब मजदूरों ने ऐसा हंगामा किया है। इससे पहले 23 फरवरी को भी मजदूरों ने रिफाइनरी में सुरक्षा बलों पर पथराव किया था। उस समय उन्होंने गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की थी। उस स्थिति को काबू में करने के लिए CISF को 2 हवाई फायर भी करने पड़े थे। उस मामले में सदर थाने में ढाई हजार अज्ञात मजदूरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।