Surajkund Fair Swing Incident Police Empty handed After 18 Days Awaiting Documents
18 दिन बाद भी पुलिस को नहीं मिला रेकॉर्ड
नवभारत टाइम्स•
सूरजकुंड मेले में झूला गिरने की घटना को 18 दिन बीत चुके हैं। पुलिस को अभी तक संबंधित विभागों से कोई कागजात नहीं मिले हैं। इस कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। पुलिस ने झूला कंपनी के मालिक, प्रदाता और ऑपरेटर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कागजात मिलने के बाद ही जांच पूरी हो सकेगी।
फरीदाबाद: सूरजकुंड मेले में हुए झूला हादसे को 18 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अभी तक जांच शुरू नहीं कर पाई है। विभागों की ओर से जरूरी कागजात न मिलने से जांच अटकी हुई है। पुलिस ने झूला कंपनी के मालिक, प्रोवाइडर और ऑपरेटर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन आगे की जांच के लिए हरियाणा टूरिज्म से टेंडर, फिटनेस और एनओसी जैसी रिपोर्ट का इंतजार है।
यह दर्दनाक हादसा 7 फरवरी की शाम को हुआ था। दिल्ली गेट के पास लगा एक झूला अचानक टूटकर गिर गया। इस हादसे में झूला झूल रहे करीब 13 लोग घायल हो गए थे। दुख की बात यह है कि राहत और बचाव कार्य में लगे इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को सिर में गंभीर चोट लगी और उनकी मौत हो गई।इस गंभीर घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत एक कमेटी बनाई, जिसकी अध्यक्षता एडीसी करेंगे। वहीं, पुलिस ने भी एक एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया है। एसआईटी में क्राइम ब्रांच और सूरजकुंड थाने के एक सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं। लेकिन, 18 दिन बीत जाने के बाद भी एसआईटी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है।
इसका मुख्य कारण यह है कि मेला आयोजित कराने वाले हरियाणा टूरिज्म और प्रशासन समेत अन्य जिम्मेदार विभागों ने पुलिस को कोई भी जरूरी कागजात नहीं दिए हैं। एसीपी क्राइम वरुण दहिया ने बताया कि उन्होंने सभी संबंधित विभागों को रिमाइंडर भेजे हैं। उन्होंने झूला कंपनी से जुड़े कई कागजात जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा है। लेकिन, अभी तक कागजात नहीं मिले हैं। वरुण दहिया ने कहा, "बगैर कागजात के जांच आगे बढ़ना संभव नहीं है।"
यह झूला हादसा सूरजकुंड मेले के मनोरंजन जोन में हुआ था। जब झूला टूटा, तो वहां अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की मौत से पूरे महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस की जांच अब इन कागजातों पर टिकी है। उम्मीद है कि जल्द ही ये कागजात मिल जाएंगे और जांच आगे बढ़ पाएगी।
इस मामले में मेला के नोडल अधिकारी हरविंदर यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। यह घटना मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। ऐसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए, ताकि ऐसी दुर्घटनाएं दोबारा न हों। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही पता चल पाएगा कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।