Tax Exemption On Rent Now Relationship With Landlord Must Be Disclosed New Rules Applicable From April 1
रेंट पर टैक्स छूट के लिए बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता
नवभारत टाइम्स•
टैक्स चोरी रोकने के लिए इनकम टैक्स विभाग नए नियम ला रहा है। अब रेंट पर टैक्स छूट लेने वालों को मकान मालिक से अपने रिश्ते की जानकारी देनी होगी। यह नया नियम नए इनकम टैक्स ऐक्ट 2025 का हिस्सा है। यह 1 अप्रैल से लागू होगा।
नई दिल्ली: इनकम टैक्स विभाग टैक्स चोरी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए नियम और फॉर्म लेकर आया है। अब घर का किराया दिखाकर टैक्स बचाने वालों को अपने मकान मालिक के साथ रिश्ते की जानकारी देनी होगी। कंपनियों के ऑडिट और पैन कार्ड के नियमों को भी कड़ा किया गया है। ये सभी बदलाव नए इनकम टैक्स ऐक्ट 2025 का हिस्सा हैं, जो इस साल 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे। सरकार ने अभी ड्राफ्ट को आम लोगों की राय के लिए जारी किया है। अगले महीने फाइनल नियम और फॉर्म नोटिफाई कर दिए जाएंगे।
नए ' फॉर्म 124 ' में किरायेदार को यह बताना होगा कि उसका मकान मालिक के साथ क्या रिश्ता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाने वाले किराये के दावों पर लगाम लगेगी, क्योंकि शुरुआत में ही सब कुछ साफ-साफ बताना होगा। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के लिए कर्मचारी को किराये की जानकारी देनी होती है।यह नया नियम उन लोगों के लिए है जो किराए के मकान में रहते हैं और टैक्स बचाना चाहते हैं। अब उन्हें यह बताना होगा कि मकान मालिक उनका कौन लगता है। इससे टैक्स विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कहीं कोई गलत तरीके से टैक्स बचाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है।
कंपनियों के ऑडिट के नियम भी सख्त किए गए हैं। इसका मतलब है कि कंपनियों को अपने खातों का हिसाब-किताब और भी ध्यान से रखना होगा। पैन कार्ड के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं, जिससे टैक्स चोरी को रोकना आसान हो जाएगा।
ये सभी बदलाव इनकम टैक्स ऐक्ट 2025 के तहत किए जा रहे हैं। यह नया कानून 1 अप्रैल से लागू हो जाएगा। सरकार ने अभी इन नियमों का ड्राफ्ट आम लोगों के लिए जारी किया है ताकि वे अपनी राय दे सकें। अगले महीने तक फाइनल नियम और फॉर्म जारी कर दिए जाएंगे।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन नए नियमों से टैक्स चोरी पर काफी हद तक लगाम लगेगी। खासकर किराए के नाम पर टैक्स बचाने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहना होगा। यह कदम टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।