NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली : कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII)- ग्रीन बिजनेस सेंटर की ओर से विकसित और क्लाइमेट कैटालिस्ट के सहयोग से तैयार की गई एक नई उद्योग तत्परता आकलन रिपोर्ट में पाया गया कि भारत ग्रीन पब्लिक प्रोक्योरमेंट (GPP) को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर इसे अनिवार्य बना दिया जाए तो इससे साल 2028 से प्रमाणित कम-कार्बन स्टील के लिए एक बड़ा बाजार बन सकता है। इसमें कहा गया कि सार्वजनिक खरीद पर हर साल 40-50 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं और सरकारी योजनाओं में करीब 3.16 करोड़ टन स्टील की खपत होती है और इससे वित्त वर्ष 2024 में 7 करोड़ टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ। अध्ययन के अनुसार अगर केवल 26% का मामूली अनिवार्य लक्ष्य भी तय कर दिया जाए तो साल 2030 तक प्राथमिक और द्वितीयक स्टील उत्पादकों से 1.6 करोड़ टन प्रमाणित ग्रीन स्टील की मांग पैदा हो सकती है।



