आंकड़ों पर एक नज़र

नवभारत टाइम्स

म्यूचुअल फंड स्कीमों को अब पांच श्रेणियों में बांटा गया है। इंडेक्स फंड, ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स में 95% निवेश अनिवार्य होगा। लाइफ साइकल फंड्स की मैच्योरिटी अवधि 5 से 30 साल तक होगी। मौजूदा स्कीमों को नए नियमों के अनुसार ढलने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। यह बदलाव निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।

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म्यूचुअल फंड स्कीमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब स्कीमों को सिर्फ 5 कैटेगरी में बांटा जाएगा: इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, लाइफ साइकल और अन्य। इंडेक्स फंड, ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में 95% निवेश करना अब जरूरी होगा। लाइफ साइकल फंड्स की मैच्योरिटी अवधि 5 से 30 साल तक की होगी। सभी मौजूदा स्कीमों को नए नियमों का पालन करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है।

यह बदलाव निवेशकों के लिए फायदेमंद होगा। अब स्कीमों को समझना आसान हो जाएगा। 5 कैटेगरी में बंटने से निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से सही स्कीम चुन पाएंगे। इंडेक्स फंड, ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स में 95% निवेश का नियम यह सुनिश्चित करेगा कि ये फंड अपने बेंचमार्क इंडेक्स को अच्छे से ट्रैक करें।
लाइफ साइकल फंड्स, जो रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए होते हैं, उनकी मैच्योरिटी अवधि 5 से 30 साल तक की होगी। इसका मतलब है कि आप अपनी रिटायरमेंट की उम्र के हिसाब से फंड चुन सकते हैं। यह निवेशकों को लंबी अवधि के लिए निवेश करने में मदद करेगा।

मौजूदा स्कीमों को नए नियमों के अनुसार ढलने के लिए 6 महीने का समय मिला है। यह समय उन्हें अपनी स्कीमों को नई कैटेगरी में लाने और नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त है। इस बदलाव से म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।