सेबी लाया 'लाइफ साइकल फंड'

नवभारत टाइम्स

सेबी ने म्यूचुअल फंड नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब स्कीमों के नाम उनके काम के आधार पर होंगे। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए 'लाइफ साइकल फंड्स' का नया विकल्प आया है। सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीमों को बंद कर दिया गया है। निवेशकों की सुरक्षा के लिए नियम सख्त किए गए हैं।

सेबी लाया 'लाइफ साइकल फंड'
मुंबई: बाजार नियामक सेबी ( Sebi ) ने म्यूचुअल फंड योजनाओं के वर्गीकरण के नियमों में बड़ा फेरबदल किया है। अब योजनाओं के नाम उनके काम के आधार पर रखे जाएंगे, न कि लुभावने नामों पर। सेबी ने 'लाइफ साइकल फंड्स' के रूप में रिटायरमेंट प्लानिंग का नया विकल्प पेश किया है, जबकि 'सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम' को बंद कर दिया है। निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिस्क्लोजर और निवेशों के ओवरलैप (एक जैसे निवेश) को लेकर नियम और सख्त किए गए हैं।

सेबी ने अपनी नई गाइडलाइंस में योजनाओं को मुख्य रूप से पांच श्रेणियों में बांटा है: इक्विटी (शेयर), डेट (कर्ज), हाइब्रिड, लाइफ साइकल और अन्य स्कीमें। इसमें 'फंड ऑफ फंड' और पैसिव स्कीम जैसे इंडेक्स फंड या ईटीएफ (ETF) भी शामिल हैं। इस बदलाव का सीधा असर उन योजनाओं पर पड़ेगा जिनके नाम आकर्षक थे लेकिन उनका काम स्पष्ट नहीं था। अब निवेशकों को यह समझने में आसानी होगी कि वे किस तरह की स्कीम में निवेश कर रहे हैं।
'सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम्स' को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इस श्रेणी की पुरानी योजनाएं अब कोई नया निवेश स्वीकार नहीं करेंगी। सेबी की मंजूरी मिलने के बाद, इन योजनाओं को वैसी ही दूसरी योजनाओं में मिला दिया जाएगा। यह कदम निवेशकों को बेहतर और स्पष्ट विकल्प देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब विदेशी सिक्योरिटीज (विदेशी निवेश) को एक अलग असेट क्लास (संपत्ति वर्ग) नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि विदेशी निवेशों को अब अन्य संपत्तियों के साथ ही वर्गीकृत किया जाएगा, जिससे योजनाओं की संरचना और तुलना आसान हो जाएगी। सेबी का यह कदम बाजार में अधिक पारदर्शिता और सरलता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।