शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन: उमा भारती

नवभारत टाइम्स

उमा भारती ने कहा कि किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। यह विवाद प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच हुआ। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रशासन पर नियंत्रण रखने की सलाह दी।

शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन: उमा भारती
भोपाल: मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोके जाने के विवाद पर मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मंगलवार को कहा कि किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखने की सलाह दी और उम्मीद जताई कि यह मामला जल्द सुलझ जाएगा।

दरअसल, माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला प्रशासन और पुलिस ने कथित तौर पर मौनी अमावस्या पर स्नान करने से रोक दिया था। इस बात को लेकर काफी विवाद हो गया। जब उमा भारती की इस टिप्पणी को योगी आदित्यनाथ के खिलाफ माना जाने लगा, तो उन्होंने तुरंत एक और पोस्ट किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नहीं है। उमा भारती ने कहा, "मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं।" लेकिन उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण रखना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। यह काम केवल शंकराचार्य या विद्वत परिषद ही कर सकते हैं।

उमा भारती ने यह भी कहा कि योगी विरोधी खुशफहमी न पालें। उनका मतलब योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बोलना नहीं था। वह सिर्फ यह कहना चाहती थीं कि प्रशासन को अपना काम ठीक से करना चाहिए, लेकिन किसी के पद का सम्मान भी करना चाहिए। किसी को यह पूछना कि वह शंकराचार्य हैं या नहीं, यह ठीक नहीं है। यह बात उन्होंने मंगलवार को कही।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रयागराज के संगम में मौनी अमावस्या के शुभ अवसर पर स्नान करने से रोका गया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए। उमा भारती ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अपनी राय दी। उन्होंने प्रशासन को नसीहत दी कि वह कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में रखे, लेकिन किसी के पद का अपमान न करे।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विवाद का जल्द ही कोई अच्छा हल निकल आएगा। उमा भारती ने यह भी साफ किया कि उनका बयान किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह सिर्फ व्यवस्था पर अपनी राय दे रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद ही तय कर सकते हैं कि कौन शंकराचार्य है।