नई दिल्ली : आम बजट से पहले स्वास्थ्य क्षेत्र की नजरें सरकार की प्राथमिकताओं पर टिकी हैं। बीते कुछ वर्षों में डिजिटल हेल्थ, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, घरेलू उत्पादन और सस्ती दवाओं को लेकर सरकारी फोकस लगातार मजबूत हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले बजट में इस दिशा को आगे बढ़ाते हुए अब सबसे ज्यादा जोर हेल्थकेयर मैनपावर और मेडिकल शिक्षा पर दिया जाना चाहिए, ताकि आम आदमी तक बेहतर और किफायती इलाज पहुंच सके।
आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी के मुताबिक, आम लोगों के लिए अच्छा स्वास्थ्य सिर्फ अस्पतालों की संख्या से तय नहीं होता, बल्कि इस बात से तय होता है कि वहां कितने प्रशिक्षित डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध हैं। वे कहते हैं कि पिछले बजटों में इंफ्रास्ट्रक्चर और बीमा कवरेज को लेकर अहम फैसले हुए, लेकिन अब जरूरत ऐसी लंबी अवधि की स्वास्थ्य नीति की है, जो इमारतों के साथ-साथ लोगों में निवेश करे। ट्रेनिंग, निरंतर मेडिकल एजुकेशन को बजट में प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि देशभर में गुणवत्ता एक-सी हो।
एक्सपर्ट आशीष चौधरी मानते हैं कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में मेडिकल सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अगर इन इलाकों में मेडिकल कॉलेजों, टीचिंग हॉस्पिटल्स और आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर्स को बढ़ावा दिया जाए तो मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी, सिमुलेशन आधारित ट्रेनिंग और स्थानीय स्तर पर इंसेंटिव्स अहम भूमिका निभा सकते हैं।



