लाइब्रेरी की किताबों का छात्र नहीं ले पा रहे लाभ

नवभारत टाइम्स

गुड़गांव के कॉलेजों की लाइब्रेरी छात्रों के लिए उपयोगी साबित नहीं हो रही है। हजारों किताबें अलमारियों में बंद हैं। छात्र वर्तमान सिलेबस से मेल न खाने वाली पुरानी किताबों से परेशान हैं। उन्हें पढ़ाई के लिए बाहर से महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

college librarys old books become burden for students forced to buy expensive books
सोनीया, गुड़गांव के कॉलेजों में लाइब्रेरी की हालत चिंताजनक है। हजारों किताबें होने के बावजूद छात्र उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वे पुरानी हैं और वर्तमान सिलेबस से मेल नहीं खातीं। इस वजह से छात्रों को महंगी किताबें बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कॉलेज प्रशासन लाइब्रेरी को अपडेट करने और डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की बात कह रहा है, लेकिन ई-बुक्स के इस दौर में भी कॉलेज की लाइब्रेरी पुराने संसाधनों तक ही सीमित हैं। सेक्टर-14 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज का बुक बैंक भी अब बंद हो गया है, जिससे छात्राओं की उम्मीदें खत्म हो गई हैं।

गुड़गांव के कॉलेजों में लाइब्रेरी की स्थिति छात्रों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। सेक्टर क्षेत्र के एक कॉलेज की लाइब्रेरी में लाखों किताबें तो हैं, लेकिन वे छात्रों के किसी काम की नहीं हैं। ज्ञान का यह भंडार अलमारियों में धूल खा रहा है, जबकि छात्रों को अपनी पढ़ाई के लिए बाहर से महंगी किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। छात्रों का कहना है कि लाइब्रेरी में ज्यादातर किताबें बहुत पुरानी हैं और आजकल के सिलेबस से उनका कोई लेना-देना नहीं है। पिछले कुछ सालों में सिलेबस काफी बदल गया है, लेकिन लाइब्रेरी में नई और अपडेटेड किताबें नहीं जोड़ी गईं। इससे छात्रों को पढ़ाई में दिक्कत हो रही है और उन्हें अपनी जरूरत की किताबें बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। इससे उन पर फालतू का आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. पुष्पा अंतिल ने बताया कि लाइब्रेरी को बेहतर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "जो भी ग्रांट मिलेगी उससे डिजिटल लाइब्रेरी बनाने का काम किया जाएगा।" आज के डिजिटल युग में, जहां ई-बुक्स और ऑनलाइन पढ़ाई का चलन बढ़ रहा है, वहीं कॉलेज की लाइब्रेरी अभी भी पुराने तरीकों पर ही अटकी हुई है। अगर लाइब्रेरी को समय के साथ अपडेट किया जाए और नए सिलेबस के हिसाब से किताबें उपलब्ध कराई जाएं, तो छात्रों की पढ़ाई में बहुत मदद मिल सकती है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग मानते हैं कि कॉलेज प्रशासन को नियमित रूप से लाइब्रेरी का ऑडिट करना चाहिए और नई किताबें, मैगजीन और डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। हाल ही में बजट से पहले मांगे गए सुझावों में भी डिजिटल लाइब्रेरी की मांग उठाई गई थी। यह दिखाता है कि सभी लोग इस समस्या को समझ रहे हैं और इसका समाधान चाहते हैं।

सेक्टर-14 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज में बने बुक बैंक से भी अब छात्रों की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। हजारों छात्राओं के लिए उम्मीद का जरिया रहा बुक बैंक अब लगभग बंद हो गया है। अब वहां से छात्राएं न तो नई किताबें ले पा रही हैं और न ही पुरानी किताबें जमा करा पा रही हैं। पहले छात्राएं बुक बैंक से नई किताबें लेती थीं और साल भर पढ़ाई करने के बाद उन्हें वापस जमा कर देती थीं। पुरानी किताबों को वहां स्टोर करके रखा जाता था, जिससे दूसरे छात्र उनका इस्तेमाल कर सकें। लेकिन अब यह सुविधा भी बंद हो गई है, जिससे छात्रों को और भी परेशानी हो रही है। यह स्थिति बताती है कि कॉलेजों को अपनी लाइब्रेरी और बुक बैंक जैसी सुविधाओं को समय के साथ अपडेट करने की सख्त जरूरत है ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके और उन पर आर्थिक बोझ कम हो।