Indira Gandhi Hospital Major Expansion Of Facilities From Dialysis To Brain Health
डायलिसिस से ब्रेन हेल्थ तक, इंदिरा गांधी अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाईं
नवभारत टाइम्स•
द्वारका स्थित इंदिरा गांधी सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है। डायलिसिस बेड की संख्या 35 से 50 कर दी गई है। एक्स-रे के लिए नई मशीन लगाई गई है और ऑपरेशन थियेटर का समय बढ़ाया गया है। ब्रेन क्लिनिक शुरू होने से सिरदर्द, दौरे और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का इलाज एक ही जगह मिल रहा है।
दिल्ली सरकार ने द्वारका स्थित इंदिरा गांधी सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल की सुविधाओं में बड़ा इजाफा किया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि डायलिसिस बेड की संख्या 35 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है, एक्स-रे जांच के लिए नई मशीन लगाई गई है और ऑपरेशन थियेटर (ओटी) का समय भी बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, एक ब्रेन क्लिनिक भी शुरू किया गया है, जिससे न्यूरोलॉजी और मनोचिकित्सा से जुड़े मरीजों को एक ही जगह इलाज मिल रहा है। यह कदम मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, डायलिसिस के लिए अब 50 बेड और मशीनें उपलब्ध हैं, जो पहले 35 थीं। ऑपरेशन थियेटर अब सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक काम करेगा। इससे हर दिन ज्यादा ऑपरेशन हो सकेंगे और मरीजों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह सुविधा खासकर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जिन्हें तुरंत ऑपरेशन की जरूरत होती है।आपातकालीन (इमरजेंसी) और गंभीर चोट (ट्रॉमा) के मामलों में मरीजों को जल्दी और सटीक जांच मिले, इसके लिए रेडियोलॉजी विभाग में एक नई 500 mA एक्स-रे मशीन लगाई गई है। यह मशीन गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जांच में तेजी लाएगी और डॉक्टरों को सही इलाज तय करने में मदद करेगी।
मई में शुरू हुए ब्रेन हेल्थ क्लिनिक में हर दिन करीब 20 से 30 न्यूरोलॉजी के मरीज और 15 से 20 मनोचिकित्सा (साइकोलॉजी) और काउंसलिंग के मरीज आ रहे हैं। यहां सिरदर्द, मिर्गी के दौरे, स्ट्रोक (दिमागी दौरा) और व्यवहार से जुड़ी समस्याओं का इलाज एक ही छत के नीचे हो रहा है। यह क्लिनिक लोगों को न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भटकने से बचाता है।
इसके अलावा, दिल्ली एम्स के सहयोग से अस्पताल में कॉर्नियल रिट्रीवल सेंटर भी खोला गया है। यह सेंटर नेत्रदान को बढ़ावा देगा और उन मरीजों को फायदा पहुंचाएगा जिन्हें कॉर्निया प्रत्यारोपण (आंख की पुतली बदलना) की जरूरत है। इससे जरूरतमंद मरीजों को नई रोशनी मिलेगी।