Let Others Live Too Discourses By Mahant Pramod Maharaj And Rajyogini Neeru
‘अपने साथ दूसरों को भी जीने दो’
नवभारत टाइम्स•
त्रिनगर के बालाजी धाम मंदिर में महंत प्रमोद महाराज ने दूसरों को उनकी इच्छानुसार जीने की स्वतंत्रता देने की बात कही। मालवीय नगर सेवा केंद्र में राजयोगिनी बहन नीरू ने गुणग्राही बनने पर गुण रूपी मोती मिलने की बात कही। यह संदेश सभी को अपने जीवन में अपनाने योग्य है।
नई दिल्ली: त्रिनगर स्थित सिद्ध शक्तिपीठ बालाजी धाम मंदिर में मंगलवार को हुए यज्ञ अनुष्ठान में महंत प्रमोद महाराज ने जीवन जीने की स्वतंत्रता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे हमें अपने मन का करने में आनंद आता है, वैसे ही दूसरों को भी उनकी मर्जी से जीने का अधिकार देना चाहिए। वहीं, मालवीय नगर सेवा केंद्र में ब्रह्माकुमारीज की राजयोगिनी बहन नीरू ने गुणग्राही बनने की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि यदि हम दूसरों के गुणों को पहचानेंगे, तो अच्छे गुण अपने आप हमें मिलने लगेंगे।
महंत प्रमोद महाराज ने यह बातें मंगलवारीय यज्ञ अनुष्ठान के दौरान कहीं। उन्होंने समझाया कि हर व्यक्ति का अपना स्वभाव होता है और उसे उसी के अनुसार जीना पसंद होता है। इसी तरह, हमें भी दूसरों की पसंद और इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें अपनी तरह से जीवन जीने की आजादी देनी चाहिए। यह आपसी सम्मान और स्वतंत्रता ही समाज को बेहतर बनाती है।दूसरी ओर, ब्रह्माकुमारीज के मालवीय नगर सेवा केंद्र में ध्यान साधना के अवसर पर राजयोगिनी बहन नीरू ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि यदि हम दूसरों के अच्छे गुणों को देखने और सराहने वाले बन जाएं, तो वे अच्छे गुण रूपी मोती हमें अपने आप ही प्राप्त होने लगेंगे। इसका मतलब है कि जब हम दूसरों में अच्छाई देखेंगे, तो वह अच्छाई हमारे अंदर भी आएगी। यह एक सकारात्मक सोच का तरीका है जो हमें बेहतर इंसान बनने में मदद करता है।