nNBT न्यूज, प्रयागराज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अमरोहा के एक हत्याकांड से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट पेश कराने संबंधी अर्जी पर पहले सुनवाई करते हुए निस्तारण करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि अर्जी पर निर्णय के बाद ही आगे की सुनवाई की जाए। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का वह आदेश भी निरस्त कर दिया, जिसमें अर्जी पर विचार को बचाव पक्ष के साक्ष्य के चरण तक टाल दिया गया था।
मामला अमरोहा जिले के गजरौला थाने में वर्ष 2015 में दर्ज केस क्राइम संख्या 332/2015 से जुड़ा है। इसमें इफ्तेखार खान के खिलाफ हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में सुनवाई चल रही है। अज्ञात शव की पहचान से संबंधित केस में अभियुक्त ने झूठा फंसाए जाने का दावा करते हुए कहा है कि सच सामने लाने के लिए डीएनए जांच जरूरी है। याचिका में कहा गया कि जांच के दौरान मृतक के परिवारीजनों ने स्वयं डीएनए जांच की मांग की थी, लेकिन विवेचक ने न तो रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की और न ही यह बताया कि जांच हुई या नहीं। इस पर अभियुक्त ने ट्रायल कोर्ट में धारा 91 सीआरपीसी/94 बीएनएसएस के तहत अर्जी देकर डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट तलब करने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की पीठ ने कहा कि ऐसी अर्जी पर विचार करने का कोई निश्चित चरण नहीं होता। चूंकि डीएनए परीक्षण मामले के मूल विवाद से सीधे जुड़ा है, इसलिए इसे टालना उचित नहीं था। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो माह के भीतर अभियोजन पक्ष को सुनवाई का अवसर देकर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।





