भारत ने ज़रूरत से ज़्यादा उत्पादन का अमेरिकी दावा खारिज किया

नवभारत टाइम्स

भारत ने अमेरिका के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि देश में ज़रूरत से ज़्यादा उत्पादन हो रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत की विशाल आबादी को देखते हुए ओवर-कैपेसिटी की बात बेबुनियाद है।

भारत ने ज़रूरत से ज़्यादा उत्पादन का अमेरिकी दावा खारिज किया
(फोटो- नवभारत टाइम्स)

NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली

कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता के बारे में अमेरिका की ओर से भारत सहित कई देशों के खिलाफ शुरू की गई जांच के बीच भारत ने कहा कि इतनी विशाल आबादी की जरूरतों को देखते हुए यहां ऐसी गुंजाइश ही नहीं है। कॉमर्स मिनिस्ट्री में अडिशनल सेक्रेटरी और डायरेक्टर जनरल ट्रेड रेमेडीज (DGTR) अमिताभ कुमार ने बुधवार को कहा कि भारत में स्टील और टेक्सटाइल्स जैसे सेक्टरों में ओवर-कैपेसिटी की जो बातें की जा रही हैं, वे बेबुनियाद हैं।

यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने इस साल मार्च में सेक्शन 301 (b) के तहत भारत सहित कई देशों के बारे में जांच शुरू की थी। उसका कहना था कि इन देशों के कुछ सेक्टरों में ओवर-कैपेसिटी और अत्यधिक उत्पादन की स्थिति है, जिससे अमेरिकी हितों को नुकसान हो सकता है।

कुमार ने कहा कि यह एक नया किस्सा गढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन में ट्रेड से जुड़े किसी भी कानून में ओवरकैपेसिटी की बात शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के टेक्सटाइल्स सेक्टर में ओवर-कैपेसिटी नहीं है। चाहे जो भी टेक्सटाइल प्रोडक्ट हो, हमारे यहां उनके प्रति व्यक्ति उपभोग का स्तर वैसे ही बहुत कम है। मैन मेड फाइबर और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के मामले में तो यह और भी कम है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में ओवर-कैपेसिटी कैसे हो सकती है, जहां सूती कपड़ों का ज्यादा उपयोग होता है, जो फटते भी ज्यादा हैं और इसके चलते डिमांड बनी रहती है। कुमार ने कहा कि स्टील में भी यही हाल है और प्रति व्यक्ति उपभोग बहुत कम है। उन्होंने कहा कि भारत भले ही दुनिया में दूसरा बड़ा स्टील उत्पादक है, लेकिन आबादी और इकनॉमिक ग्रोथ के हिसाब से देखें तो यहां उपभोग का स्तर बहुत कम है।

इससे पहले USTR की जांच के संबंध में दिए गए जवाब में भारत ने आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि USTR के नोटिस में ऐसे ठोस सबूत नहीं दिए गए, जिनसे पता चलता हो कि भारत के प्रमुख उद्योग क्षेत्रों में ओवर-कैपेसिटी की स्थिति है, जिसके चलते अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस की स्थिति बनती है।