‘RTI के तहत जानकारी देनी होगी ग्रुप हाउसिंग सासायटीज को’

नवभारत टाइम्स

ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों को अब RTI के तहत जानकारी देनी होगी। द्वारका की एक सोसायटी के मामले में चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर ने रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटी को सख्त निर्देश दिए हैं। पार्किंग स्थल पर कब्जे को लेकर पीड़ित परिवार ने सोसायटी से सूचना मांगी थी, लेकिन जवाब नहीं मिला।

group housing societies will have to provide information under rti strict instructions from cic
नई दिल्ली: ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों से जुड़ी जानकारी अब RTI के तहत आसानी से मिल सकेगी। चीफ इंफर्मेशन कमिश्नर (CIC) ने रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटी (RCS) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे RTI के तहत मांगी गई जानकारी दें। यह फैसला द्वारका की चिनार हाउसिंग सोसायटी, मैजेस्टिक अपार्टमेंट के एक मामले में आया है। एक पीड़ित परिवार ने अपनी कवर्ड पार्किंग पर अवैध कब्जे को लेकर सोसायटी की मैनेजमेंट कमिटी (MC) से जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला। इसके बाद, परिवार ने RCS से गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब उन्होंने RTI का सहारा लिया।

जब RTI पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तो पीड़ित परिवार ने यह मामला CIC के पास पहुंचाया। द्वारका निवासी ओपी खुराना ने यह मामला CIC को भेजा था। CIC ने RCS को आदेश दिया है कि वे 15 दिनों के अंदर पीड़ित परिवार को सही जानकारी उपलब्ध कराएं। इतना ही नहीं, CIC ने गलत सूचना देने के मामले में सोसायटी की MC के अध्यक्ष प्रवीण वाधवा के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यह मामला पार्किंग स्थल पर कब्जे से जुड़ा था। जब पीड़ित परिवार को सोसायटी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने RCS से मदद मांगी। लेकिन जब RCS ने भी कोई कार्रवाई नहीं की, तो परिवार ने RTI के जरिए आधिकारिक तौर पर जानकारी हासिल करने की कोशिश की। इस पर भी जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामला CIC तक पहुंचा। CIC के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

यह घटना बताती है कि ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लोगों को अपने अधिकारों के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है। RTI एक ऐसा माध्यम है जो आम आदमी को सरकारी विभागों से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है। इस मामले में CIC के सख्त रुख से यह साफ हो गया है कि अब सोसायटियों को भी RTI के नियमों का पालन करना होगा और लोगों को जानकारी देने में आनाकानी नहीं कर पाएंगे। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जो अपनी सोसायटियों में होने वाली अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं।