होलिका दहन से चढ़ा बुराई पर अच्छाई की जीत का रंग

नवभारत टाइम्स

गुड़गांव में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका दहन सोमवार को धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने होलिका की पूजा कर सुख-शांति की कामना की। होलिका की आग में नकारात्मकता का दहन किया गया। मंगलवार को ग्रहण के कारण बुधवार को रंगोत्सव मनाया जाएगा। सोसायटियों में ड्राई होली और होली मिलन कार्यक्रम होंगे।

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गुड़गांव में सोमवार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका दहन आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर भर की कॉलोनियों, गांवों और बाजारों में जगह-जगह लकड़ी और उपलों से सजी होलिका की पूजा की गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह देखा गया। होलिका दहन के लिए महिलाएं पारंपरिक परिधानों में पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। नरसिंह भगवान से सुख-शांति और बच्चों की दीर्घायु की कामना की गई। होलिका की आग में गेहूं, चने की बालियां, जौ और गोबर के उपले डाले गए। इस बार ग्रहण के चलते होलिका पूजन का समय विशेष रहा, जिसे ज्योतिषाचार्यों ने शुभ मुहूर्त बताया। मंगलवार सुबह सूतक लगने के कारण श्रद्धालु पूजन और परिक्रमा नहीं कर सकेंगे।

शुभ मुहूर्त का फायदा उठाते हुए अधिकतर स्थानों पर सुबह साढ़े दस बजे से ही होलिका की पूजा शुरू हो गई थी। कच्चे सूत से सात बार होलिका की परिक्रमा की गई। रोली और चावल से तिलक लगाकर घर की बनी मिठाई होलिका को अर्पित की गई। देर शाम को होलिका का दहन किया गया। मान्यता है कि इस दिन अग्नि में पुरानी नकारात्मकता और कष्टों का दहन कर नई ऊर्जा और सकारात्मकता का स्वागत किया जाता है। लोग होलिका की राख को अपने घर भी ले गए।
मंगलवार को ग्रहण के चलते रंगोत्सव एक दिन आगे बढ़ा दिया गया है। अब बुधवार को रंगोत्सव मनाया जाएगा। सोसायटियों और सेक्टरों में ड्राई होली खेली जाएगी। जगह-जगह होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। शहर के पॉश इलाकों में फूलों की होली के साथ अबीर-गुलाल और डांस पार्टियों का भी आयोजन होगा। डीजे और ढोल की धुनों पर लोग जमकर थिरकेंगे।

होलिका दहन के अवसर पर शहर के विभिन्न सेक्टरों में भी महिलाएं एकत्र हुईं। उन्होंने होलिका की पूजा की और नरसिंह भगवान से प्रार्थना की। बच्चों की लंबी उम्र और घर में सुख-शांति की कामना की गई। बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया गया और होलिका पूजन किया गया।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार होलिका पूजन का समय विशेष था क्योंकि ग्रहण लगने वाला था। सोमवार दोपहर के समय शुभ मुहूर्त में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होलिका की पूजा की गई। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह से सूतक लगने के कारण श्रद्धालु पूजन और परिक्रमा नहीं कर पाएंगे।

नकारात्मकता को दूर करने के उद्देश्य से, शुभ मुहूर्त का लाभ उठाते हुए, सुबह साढ़े दस बजे से ही होलिका की पूजा शुरू कर दी गई थी। लोगों ने कच्चे सूत से सात बार होलिका की परिक्रमा की। रोली और चावल से तिलक लगाकर घर पर बनी मिठाई होलिका को भेंट की गई। देर शाम को होलिका का दहन किया गया। होलिका दहन के बाद, लोग होलिका की राख को अपने घरों में ले आए। ऐसी मान्यता है कि इस दिन अग्नि में पुरानी नकारात्मकता और कष्टों को जलाकर नई ऊर्जा और सकारात्मकता का स्वागत किया जाता है।

रंगोत्सव बुधवार को मनाया जाएगा। मंगलवार को ग्रहण के कारण, होलिका पूजन एक दिन पहले ही संपन्न हो गया था। बुधवार को सोसायटियों और सेक्टरों में ड्राई होली खेली जाएगी। कई जगहों पर होली मिलन समारोह आयोजित किए गए हैं। शहर के पॉश इलाकों में फूलों की होली के साथ-साथ अबीर-गुलाल और डांस पार्टियों का भी आयोजन होगा। डीजे और ढोल की धुन पर लोग नाच-गाकर होली का जश्न मनाएंगे।