मैन्युफैक्चरिंग में सुस्ती, 3 महीने के निचले स्तर पर

नवभारत टाइम्स

भारत के औद्योगिक उत्पादन में जनवरी में गिरावट आई है। मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर के धीमे प्रदर्शन के चलते यह ग्रोथ पिछले तीन महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। यह आँकड़ा 4.8 प्रतिशत दर्ज किया गया है। पिछले साल जनवरी में यह दर 5.2 प्रतिशत थी। यह जानकारी एक सरकारी बयान में दी गई है।

indias industrial production at 3 month low in january manufacturing slowdown
इस साल जनवरी में भारत के औद्योगिक उत्पादन (IIP) की रफ्तार धीमी पड़ गई। मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर के खराब प्रदर्शन की वजह से यह ग्रोथ घटकर 4.8 प्रतिशत पर आ गई। यह पिछले तीन महीनों में सबसे कम है। औद्योगिक उत्पादन को इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) से मापा जाता है। पिछले साल जनवरी 2025 में यह ग्रोथ 5.2 प्रतिशत थी। यह जानकारी एक सरकारी बयान में दी गई है।

यह गिरावट चिंता का विषय है क्योंकि यह दिखाता है कि देश के बड़े उद्योग, जैसे कि सामान बनाने वाले कारखाने और खदानें, उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। इस धीमी ग्रोथ का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
औद्योगिक उत्पादन (IIP) एक ऐसा पैमाना है जो देश में बनने वाले सामानों और खदानों से निकलने वाले खनिजों के उत्पादन में होने वाले बदलाव को बताता है। यह अर्थव्यवस्था की सेहत का एक अहम संकेत होता है।

जनवरी 2025 में औद्योगिक उत्पादन 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा था, लेकिन इस साल जनवरी में यह आंकड़ा 4.8 प्रतिशत पर आ गया। यह दिखाता है कि पिछले साल की तुलना में इस साल औद्योगिक गतिविधियों में कमी आई है।

यह गिरावट मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग सेक्टर में आई सुस्ती का नतीजा है। इन दोनों सेक्टरों का औद्योगिक उत्पादन में बड़ा योगदान होता है। जब ये सेक्टर अच्छा प्रदर्शन नहीं करते, तो इसका असर पूरे औद्योगिक उत्पादन पर पड़ता है।