यक्ष ऐप में सत्यापन सुस्त, तय समय में पूरे नहीं हो रहे काम

नवभारत टाइम्स

यक्ष ऐप के ज़रिए अपराधियों की निगरानी का काम धीमा चल रहा है। जियो-टैगिंग और जनसंख्या फीडिंग जैसे ज़रूरी काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। डीजीपी ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि लंबित कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करें। फील्ड विजिट आधारित सत्यापन की गति भी धीमी है।

yaksha app verification delayed dgp expresses displeasure directs completion of work within deadline
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्णा ने अपराधियों की निगरानी के लिए बनाए गए यक्ष ऐप के सत्यापन और अपडेशन में हो रही देरी पर सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि तय समय सीमा में यह काम पूरा करें, वरना जवाबदेही तय की जाएगी। यह काम इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि अपराधियों पर बेहतर नजर रखी जा सके और फील्ड इंटेलिजेंस को मजबूत किया जा सके।

डीजीपी के सर्कुलर के मुताबिक, गांवों और मोहल्लों की जियो-टैगिंग (यानी मैप पर सही जगह मार्क करना) तो लगभग पूरी हो गई है। लेकिन, बीट (पुलिस का छोटा इलाका) के अहम ठिकानों और CCTV कैमरों की लोकेशन की जियो-टैगिंग बहुत धीमी गति से चल रही है। कई चौकियों और बीटों में यह काम अभी भी अटका हुआ है।
इसके अलावा, गांवों और मोहल्लों की जनसंख्या की जानकारी (फीडिंग) भी कई जगहों पर अधूरी है। यह काम बीट के पुलिसकर्मियों और चौकी इंचार्ज को पूरा करना था। थाना स्तर पर बने वेब डैशबोर्ड पर अपराधियों के पते का सत्यापन भी पूरा नहीं हुआ है। कई हिस्ट्रीशीटर (पुराने अपराधी) और नए गैंगों से जुड़े लोगों को ऐप में जोड़ने और उनका आखिरी सत्यापन करने का काम भी बाकी है।

16 फरवरी से यह मॉड्यूल खुला होने के बावजूद, फील्ड में जाकर (यानी मौके पर जाकर) सत्यापन करने की रफ्तार बहुत धीमी है। कई पुलिसकर्मियों ने तो फील्ड सत्यापन शुरू ही नहीं किया है। वे जियो-टैगिंग के आधार पर घर की फोटो भी अपलोड नहीं कर रहे हैं। लाइसेंस वाले हथियारों के मालिकों का सत्यापन और ऐप अपडेट भी कई बीटों में अधूरा है।

अपराधियों से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी, जैसे कि उनके वाहन, रिश्तेदार और उनकी गतिविधियां, भी ऐप में अपडेट नहीं की गई हैं। डीजीपी ने साफ निर्देश दिए हैं कि नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जाए। पुलिसकर्मी फील्ड में जाकर सत्यापन करें, सही फोटो और लोकेशन अपलोड करें। अगर ऑफलाइन (इंटरनेट के बिना) सत्यापन करते हैं, तो बाद में उसे सिंक (ऑनलाइन करना) जरूर करें। साथ ही, गुमशुदा, संदिग्ध और वांछित लोगों की जानकारी तुरंत दर्ज की जाए। यह सब इसलिए जरूरी है ताकि यक्ष ऐप अपराधियों पर नकेल कसने में कारगर साबित हो सके।