अब दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने से परहेज कर रहे अमीर भारतीय

नवभारत टाइम्स

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अमीर भारतीय दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने से कतरा रहे हैं। हालिया घटनाओं ने दुबई की सुरक्षित निवेश की छवि को प्रभावित किया है। हालांकि, कुछ बिल्डर्स अभी भी भारतीय ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। रियल एस्टेट मार्केट में सेंटिमेंट का असर दिख रहा है, लेकिन फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं।

rich indians hesitate to invest in dubai property amidst west asia crisis
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच भारतीय अमीर फिलहाल दुबई के रियल एस्टेट से दूरी बना रहे हैं। पहले जहां दुबई में प्रॉपर्टी की बिक्री में भारतीयों की हिस्सेदारी 2024 में 6% थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 10% हो गई थी। लेकिन हाल ही में ईरान द्वारा दुबई में किए गए हमलों ने एक सुरक्षित निवेश स्थल के तौर पर इसकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। इस वजह से भारतीय निवेशक, जो पहले दुबई में साउथ मुंबई और गुरुग्राम से सस्ती प्रॉपर्टी खरीदकर अच्छा किराया कमा रहे थे, अब सतर्क हो गए हैं।

कई सालों से दुबई के बड़े बिल्डर्स जैसे Emaar, DAMAC, Sobha, Danube, Nakheel और Dubai Holding भारतीय ग्राहकों को लुभा रहे थे। दुबई में प्रॉपर्टी की कीमतें 2.5 से 3 करोड़ रुपये से शुरू होती हैं और वहां अच्छा किराया भी मिल जाता है। यह साउथ मुंबई और गुरुग्राम जैसे शहरों की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है। इतना ही नहीं, कई भारतीय रियल एस्टेट कंपनियों ने भी यूएई में अपने प्रोजेक्ट शुरू कर दिए थे।
हालांकि, हालिया घटनाक्रमों ने निवेशकों के मन में चिंता पैदा कर दी है। ईरान के हमलों के बाद दुबई की सुरक्षित निवेश स्थल वाली पहचान पर सवाल उठने लगे हैं। इस वजह से भारतीय अमीर, जो पहले दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे थे, अब पीछे हट रहे हैं।

डेन्यूब ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन रिजवान साजन इस स्थिति को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं। उनका कहना है कि रियल एस्टेट मार्केट में अभी फंडामेंटल स्ट्रक्चरल शिफ्ट से ज्यादा सेंटिमेंट का प्रभाव दिख रहा है। वह मानते हैं कि इस तरह की घटनाओं से थोड़ी अस्थाई अनिश्चितता आ सकती है, लेकिन लंबे समय में इसका क्या असर होगा, यह कहना अभी मुश्किल है। रिजवान साजन का मानना है कि ओवरऑल फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत बने हुए हैं।

यह समझना ज़रूरी है कि रियल एस्टेट मार्केट में भावनाएं (सेंटिमेंट) भी एक बड़ी भूमिका निभाती हैं। जब कोई अप्रत्याशित घटना होती है, तो निवेशक थोड़ा घबरा जाते हैं और निवेश से पीछे हट सकते हैं। लेकिन अगर प्रॉपर्टी के मूल आधार (फंडामेंटल्स) मजबूत हैं, जैसे कि अच्छी लोकेशन, मांग और किराया मिलने की क्षमता, तो यह अनिश्चितता अक्सर अस्थायी होती है। दुबई के मामले में, प्रॉपर्टी की कीमतें और किराए की दरें अभी भी आकर्षक हो सकती हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।