पूरा यूपी होगा एक राज्य, RSS में खत्म होगी प्रांत व्यवस्था

नवभारत टाइम्स

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी में है। शताब्दी वर्ष के मौके पर संगठन में अहम परिवर्तन होंगे। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इन बदलावों पर मुहर लगेगी। पूरे उत्तर प्रदेश को एक राज्य इकाई के तौर पर देखा जाएगा। प्रांत व्यवस्था खत्म होगी और संभाग व उपसंभाग की नई व्यवस्था लागू होगी।

big reshuffle in rss preparation to make entire up one state provincial system to end
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर अपने संगठन के ढांचे में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इन बदलावों के तहत पदाधिकारियों के पदनाम और उनके कार्यक्षेत्रों में अहम फेरबदल होगा। इन महत्वपूर्ण निर्णयों पर 13 मार्च से शुरू होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में मुहर लगेगी। इस बैठक में भाजपा और संघ के अन्य आनुषंगिक संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी शामिल होंगे।

यह बैठक 13 से 15 मार्च तक पानीपत में आयोजित की जाएगी। इस बार के एजेंडे में संघ के संगठनात्मक ढांचे में सुधार प्रमुख है। अभी देश भर में संघ के 11 कार्य क्षेत्र हैं, जिन्हें घटाकर नौ करने का प्रस्ताव है। उत्तर प्रदेश में अभी दो कार्य क्षेत्र हैं - पूर्वी और पश्चिमी। पश्चिमी क्षेत्र में उत्तराखंड भी शामिल है। नए प्रस्ताव के अनुसार, पूरे देश में नौ कार्य क्षेत्र होंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को एक इकाई के तौर पर देखा जाएगा।
उत्तर प्रदेश में अभी छह प्रांत हैं: पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरक्ष। इन प्रांतों की व्यवस्था को खत्म कर दिया जाएगा। इसके बजाय, संभाग (division) की व्यवस्था लागू की जाएगी। संभाग के अंदर उप-संभाग (sub-division) भी बनाए जाएंगे। इस तरह, पूरे उत्तर प्रदेश को एक राज्य इकाई माना जाएगा, जिसके अंतर्गत संभाग और उप-संभाग होंगे। इन नए संभागों और उप-संभागों का कार्यक्षेत्र मौजूदा प्रांतों से छोटा होगा।

इसी नए बंटवारे के आधार पर प्रचारकों और अन्य पदाधिकारियों के पदनाम तय किए जाएंगे। इसका मतलब है कि पूरे राज्य स्तर पर एक सर्वोच्च पदाधिकारी होगा। उसके नीचे की व्यवस्था को विकेंद्रीकृत (decentralized) किया जाएगा, जिससे काम काज आसान और प्रभावी हो सके। यह बदलाव संघ को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने और संगठन को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह संगठनात्मक पुनर्गठन संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संगठन को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है। नए ढांचे से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और उनकी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने में मदद मिलेगी। यह बदलाव संघ के विस्तार और उसके सामाजिक कार्यों को गति देने में भी सहायक सिद्ध होगा। बैठक में इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा होगी और अंतिम निर्णय लिया जाएगा।