Smart City Mission 677 Projects Completed In 10 Cities Of Uttar Pradesh Remaining 5 To Be Finished By March
स्मार्ट सिटी के 677 प्रॉजेक्ट पूरे
नवभारत टाइम्स•
उत्तर प्रदेश के दस शहरों में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 677 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। शेष पांच परियोजनाएं 15 मार्च तक पूरी होने की उम्मीद है। अलीगढ़, प्रयागराज, लखनऊ और सहारनपुर में कुछ काम बाकी हैं। वित्तीय प्रबंधन और समय पर काम पूरा न होने पर सवाल उठे हैं।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 10 शहरों में 682 में से 677 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी 5 परियोजनाएं 15 मार्च तक पूरी होने का दावा किया गया है। नगर विकास विभाग के अनुसार, आगरा, अलीगढ़, बरेली, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर और वाराणसी को स्मार्ट सिटी के तौर पर चुना गया था। अलीगढ़, प्रयागराज, लखनऊ और सहारनपुर में कुछ परियोजनाएं अभी अधूरी हैं। विभाग का कहना है कि मार्च तक राज्य में स्मार्ट सिटी मिशन का सारा काम खत्म हो जाएगा। हालांकि, परियोजनाओं के समय पर पूरा न होने और पैसों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि स्मार्ट सिटी के लिए जारी बजट का सही इस्तेमाल नहीं हुआ, जिससे काम में देरी हुई। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि 10 शहरों को दिए जाने वाले बजट के आवंटन में गड़बड़ी हुई। वित्तीय वर्ष 2022-23 में सिर्फ 4 शहरों को पूरा बजट मिला, जबकि बाकी 6 शहरों का 30% से 40% बजट रोका गया। इसके बावजूद, सभी शहरों ने 100% बजट खर्च दिखाया, जिससे यह सवाल उठा कि रोका गया पैसा समय पर क्यों नहीं जारी किया गया। ऑडिट टीम को विभाग ने इन आपत्तियों का जवाब नहीं दिया और न ही बजट में अंतर का कोई कारण बताया। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, परियोजनाएं पूरी करने की समय सीमा तीन बार बढ़ाई गई, लेकिन काम समय पर नहीं हुए। सूत्रों का कहना है कि 31 मार्च 2025 के बाद केंद्र सरकार ने नया फंड जारी नहीं किया। विशेष सचिव नगर विकास प्रवीण लक्षकार ने बताया कि पांच शहरों में काम पहले ही पूरा हो चुका है और बाकी पांच शहरों में बचे हुए छोटे-मोटे काम अगले महीने तक खत्म हो जाएंगे।
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के 10 शहरों में चल रहे विकास कार्यों पर सवालिया निशान लग गया है। इन शहरों में कुल 682 परियोजनाएं स्वीकृत थीं, जिनमें से 677 पूरी हो चुकी हैं। बाकी बची 5 परियोजनाओं को 15 मार्च तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है। जिन शहरों को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला था, उनमें आगरा, अलीगढ़, बरेली, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर और वाराणसी शामिल हैं।हालांकि, काम पूरा होने के दावों के बीच वित्तीय प्रबंधन और समय पर काम न होने को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट सिटी के लिए जारी किए गए बजट का सही और समय पर इस्तेमाल नहीं हुआ। इसी वजह से परियोजनाओं में देरी हुई। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 10 शहरों को आवंटित बजट में काफी मनमानी हुई। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 10 में से केवल 4 शहरों को पूरा बजट मिला। बाकी 6 शहरों का बजट 30% से 40% तक रोक लिया गया था। इसके बावजूद, सभी शहरों ने 100% बजट खर्च करने का दावा किया। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि रोका गया पैसा समय पर क्यों नहीं जारी किया गया। ऑडिट टीम ने इस मामले में विभाग से जवाब मांगा, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। विभाग ने बजट स्वीकृतियों में अंतर का कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया।
परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा भी कई बार बढ़ाई गई। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 के बाद परियोजनाएं पूरी करने की तारीख तीन बार बदली गई। पहले इसे जून 2023 तक बढ़ाया गया, फिर 30 जून 2024 तक और उसके बाद 31 मार्च 2025 तक। इन तारीखों के बढ़ने के बावजूद, सभी कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए। सूत्रों का कहना है कि 31 मार्च 2025 के बाद केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन के लिए कोई नया फंड जारी नहीं किया है।
इस बारे में विशेष सचिव नगर विकास प्रवीण लक्षकार का कहना है कि पांच शहरों में सभी काम पहले ही पूरे हो चुके हैं। बाकी बचे पांच शहरों में भी जो इक्का-दुक्का काम बचे हैं, वे अगले महीने तक पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि मार्च तक राज्य में स्मार्ट सिटी मिशन के सभी काम पूरे हो जाएंगे। हालांकि, वित्तीय अनियमितताओं और समय पर काम न होने के आरोपों पर उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। यह स्थिति उत्तर प्रदेश में स्मार्ट सिटी मिशन के कार्यान्वयन पर चिंता पैदा करती है।