सहायक अध्यापिका के पास आय से "1.22 करोड़ अधिक मिले

नवभारत टाइम्स

बख्शी का तालाब की सहायक अध्यापिका सीता पाठक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज हुआ है। विजिलेंस की जांच में उनके पास ज्ञात आय से करीब एक करोड़ 22 लाख रुपये अधिक संपत्ति मिली है। सीता पाठक इस अतिरिक्त संपत्ति का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सकीं। विभाग अब इस मामले की गहन पड़ताल कर रहा है।

assistant teacher found with assets worth 122 crore more than income vigilance registers case
लखनऊ: विजिलेंस लखनऊ के सीआई सेक्टर ने बख्शी का तालाब के सुवंशीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका सीता पाठक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। जांच में पता चला है कि सीता पाठक ने अपनी ज्ञात आय से करीब एक करोड़ 22 लाख 76 हजार रुपये की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की है। शासन के आदेश पर छह जनवरी 2023 को शुरू हुई इस जांच में सीता पाठक की कुल आय एक करोड़ 46 लाख 55 हजार रुपये आंकी गई, जबकि उनकी कुल संपत्ति और खर्च करीब दो करोड़ 69 लाख 31 हजार रुपये पाए गए। इस भारी अंतर के लिए सीता पाठक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं। विजिलेंस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि इस अतिरिक्त संपत्ति के पीछे किसका हाथ है।

विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस कानून के तहत आय से अधिक संपत्ति रखना एक गंभीर अपराध है। विभाग अब सीता पाठक की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेशों, खर्चों और आय के अन्य सभी स्रोतों की बारीकी से पड़ताल करेगा। यह भी देखा जाएगा कि कहीं इस अतिरिक्त संपत्ति को बनाने में किसी और व्यक्ति या किसी अन्य माध्यम का तो हाथ नहीं है। अगर जांच में और भी ऐसे तथ्य सामने आते हैं, तो मामले में और भी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं और आरोप बढ़ाए जा सकते हैं।
यह आय से अधिक संपत्ति की गणना सीता पाठक के पूरे सेवाकाल को ध्यान में रखकर की गई है। इसमें उनके वेतन, भत्ते, अन्य ज्ञात आय और उनके द्वारा किए गए खर्चों का पूरा हिसाब शामिल है। विजिलेंस यह भी पता लगा रही है कि सीता पाठक ने अपने सेवाकाल के दौरान किन-किन जिलों में नौकरी की है। उनकी विभिन्न तैनाती के दौरान उन्हें मिले वेतन, एरियर, भत्ते और अन्य वित्तीय लाभों का पूरा ब्योरा भी जांच के दायरे में है।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि सीता पाठक ने अपनी संपत्तियों की जानकारी विभागीय अभिलेखों में भी ठीक से नहीं दी थी। यह एक गंभीर बात है क्योंकि सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा विभाग को देना होता है। जब उनसे इस अतिरिक्त आय और खर्च के बारे में पूछा गया, तो वह कोई भी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाईं। इससे यह शक और गहरा हो गया है कि उन्होंने अवैध तरीके से पैसा कमाया है।

विजिलेंस की यह जांच काफी लंबी चलने वाली है। इसमें हर छोटी से छोटी बात की पड़ताल की जाएगी ताकि सच सामने आ सके। यह मामला सरकारी कर्मचारियों में फैले भ्रष्टाचार पर एक बार फिर से सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों से आम जनता का सरकारी तंत्र पर से भरोसा उठने लगता है। उम्मीद है कि विजिलेंस इस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी और दोषियों को सजा दिलाएगी। यह जांच इस बात का भी संकेत देती है कि सरकारी महकमों में भी अब भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की कोशिशें तेज हो गई हैं।