बेक़ाबू होगी जंग

नवभारत टाइम्स

अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जंग का खतरा बढ़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की होड़ से ऊर्जा संकट गहरा सकता है। ईरान ने इस्राइल के शहरों को निशाना बनाया है। संघर्ष हिंद महासागर तक फैल गया है। पावर ग्रिड पर हमले से व्यवस्था ठप हो सकती है। आम लोगों को परेशानी होगी।

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अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर धकेल दिया है। एक-दूसरे के अहम ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियों से हालात और बिगड़ रहे हैं। डॉनल्ड ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद ईरान ने आक्रामक रुख अपना लिया है। होर्मुज स्ट्रेट, जो ग्लोबल ऑयल-गैस सप्लाई चेन के लिए बेहद ज़रूरी है, पर नियंत्रण की होड़ ने जंग के बेकाबू होने का डर पैदा कर दिया है। ईरान ने इस्राइल के न्यूक्लियर प्लांट वाले शहरों डिमोना और अराद को निशाना बनाया है, और डिएगो गार्सिया पर लंबी दूरी की मिसाइलें दागी हैं। यह संघर्ष हिंद महासागर तक फैल गया है, जिससे यूरोप के बड़े शहर भी ईरानी हथियारों की जद में आ गए हैं। अगर अमेरिका-इस्राइल ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला करते हैं, तो बदले का एक नया दौर शुरू हो सकता है जिसे रोकना मुश्किल होगा। पावर ग्रिड और अहम ठिकानों पर हमले से पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी, जिसका सबसे बुरा असर ईरान के आम लोगों पर पड़ेगा। युद्धविराम और बातचीत ही इसका हल है।

दुनिया पहले से ही गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है, और अमेरिका-इस्राइल व ईरान के बीच युद्ध की वजह से यह संकट और गहराता जा रहा है। एक-दूसरे के अहम रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियों से हालात और भी खराब हो रहे हैं। इसका असर अब दिखने भी लगा है। डॉनल्ड ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद ईरान ने और भी आक्रामक तरीके से जवाब देना शुरू कर दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, पर नियंत्रण को लेकर जंग का खतरा मंडरा रहा है। इस स्ट्रेट पर नियंत्रण की होड़ ने इस डर को बढ़ा दिया है कि कहीं यह जंग पूरी तरह से बेकाबू न हो जाए।

ईरान को लेकर अमेरिका और इस्राइल की योजनाओं में कुछ कन्फ्यूजन दिखाई दे रहा है। पहले तो ट्रंप ने कहा कि उन्हें होर्मुज स्ट्रेट से कोई लेना-देना नहीं है और जो देश वहां से तेल-गैस मंगाते हैं, उन्हें आगे आकर जिम्मेदारी लेनी चाहिए। लेकिन फिर उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने 48 घंटे के अंदर होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला, तो उसके पावर प्लांट्स पर हमला किया जाएगा। इसके जवाब में ईरान ने भी धमकी दी है कि वह खाड़ी में मौजूद एनर्जी और वॉटर साइट्स को निशाना बनाएगा।

ट्रंप की बदलती रणनीति और बयानों से साफ है कि उन पर दबाव बढ़ रहा है। एक तरफ घरेलू राजनीति का दबाव है, तो दूसरी तरफ दुनिया भर में ऊर्जा संकट का दबाव। लेकिन, जब लड़ाई इतनी खुल चुकी हो, तो सिर्फ धमकियों से काम नहीं चलता। खुद को मजबूत दिखाने के लिए ईरान ने और भी आक्रामक ढंग से जवाब देना शुरू कर दिया है।

ईरान ने इस्राइल के डिमोना और अराद शहरों को निशाना बनाया है। ये वो शहर हैं जहाँ न्यूक्लियर प्लांट हैं। इसके बाद, ईरान ने डिएगो गार्सिया पर लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं। यह बहुत चिंता की बात है कि संघर्ष अब हिंद महासागर में मौजूद एक द्वीप तक पहुँच गया है। इसका मतलब है कि यूरोप के बड़े शहर भी अब ईरानी हथियारों की रेंज में आ गए हैं। ऐसे में, अगर अमेरिका और इस्राइल ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाते हैं, तो बदले का एक नया दौर शुरू हो सकता है, जिसे रोकना फिर किसी के लिए भी बहुत मुश्किल हो जाएगा।

चिंता सिर्फ युद्ध के फैलने को लेकर ही नहीं है, बल्कि इसके संभावित परिणामों को लेकर भी है। पावर ग्रिड और दूसरे अहम रणनीतिक ठिकानों पर हमले से पूरी व्यवस्था चरमरा सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर ईरान के आम लोगों पर पड़ेगा, जो पहले से ही कई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इस तरह के किसी भी कदम का असर आसपास के देशों पर भी पड़ सकता है। ईरान कुछ बिजली इराक और पाकिस्तान को भी बेचता है। इसलिए, यह बहुत ज़रूरी है कि तुरंत युद्धविराम हो और दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आकर इस समस्या का हल निकालें।