Forest Conservation Is Mans Moral Responsibility Yogi Adityanath Brave Children And Social Organizations Honored On International Forest Day
मनुष्य की नैतिक जिम्मेदारी है वन संरक्षण : योगी
नवभारत टाइम्स•
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन संरक्षण को मनुष्य की नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने बहादुरी दिखाने वाले बच्चों, सामाजिक संगठनों और वन विभाग के कर्मचारियों को सम्मानित किया। कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के तहत किसानों को चेक भी बांटे गए। यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ।
लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहादुर बच्चों, अच्छा काम करने वाले सामाजिक संगठनों और कर्मचारियों को सम्मानित किया। उन्होंने कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के तहत दो किसानों को चेक भी बांटे। मुख्यमंत्री ने 'वन एवं अर्थव्यवस्थाएं' विषय पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन करते हुए कहा कि वन संरक्षण जीव सृष्टि के लिए बहुत ज़रूरी है और मनुष्य की यह नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वह इसके लिए प्रयास करे।
बहादुरी दिखाने वाले बच्चों में बहराइच के 10 साल के अच्छे लाल और प्रयागराज की 19 साल की तनु सिंह शामिल थीं। तनु ने झांसी के एक गांव में तेंदुए के घर में घुसने पर सूझबूझ दिखाते हुए दो छोटे बच्चों को बाहर निकाला और तेंदुए को कमरे में बंद कर दिया। वहीं, अच्छे लाल ने अपने पिता के साथ खेत से घर लौटते समय गन्ने के खेत से अचानक हमला करने वाले तेंदुए का बहादुरी से सामना किया, जिससे तेंदुआ डरकर भाग गया।मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। इनमें मुरादाबाद प्रभाग के उप क्षेत्रीय वन अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह, हमीरपुर प्रभाग के वन रक्षक सुनील कुमार गौड़, रामपुर प्रभाग के वन रक्षक शिवम कुमार और एटा प्रभाग की माली रीना शर्मा को प्रशस्ति पत्र दिए गए। समाज सेवा के क्षेत्र में लोकभारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह और हेल्पिंग हैंड्स सेवा संस्थान झांसी के सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव को भी सम्मानित किया गया।
कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के तहत कुशीनगर के किसान ईश्वर चंद और रायबरेली की किसान सुनीता को चेक दिए गए। यह प्रोजेक्ट किसानों को पर्यावरण के अनुकूल खेती करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे वे कार्बन उत्सर्जन कम कर सकें और इसके बदले में आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकें।
इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण सक्सेना और राज्य मंत्री केपी मलिक सहित विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वन हमारी पृथ्वी के लिए फेफड़ों की तरह हैं और इनके बिना जीवन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए इन अनमोल संपदाओं को बचाना होगा।
वन संरक्षण केवल सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पेड़ लगाना, पानी बचाना और प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करना, भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीना सीखना होगा।
राष्ट्रीय वानिकी संवाद में 'वन एवं अर्थव्यवस्थाएं' विषय पर चर्चा हुई, जिसमें वनों के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला गया। वनों से हमें लकड़ी, फल, औषधियां और कई अन्य संसाधन मिलते हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। साथ ही, वन पर्यटन को बढ़ावा देकर भी आय अर्जित की जा सकती है।
इस तरह के सम्मान समारोह लोगों को अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी सम्मानित व्यक्तियों को बधाई दी और भविष्य में भी इसी तरह के सराहनीय कार्य करते रहने की प्रेरणा दी।