Books Arrive For New Session In Government Schools 80 Thousand Students To Benefit
नए सत्र को सरकारी स्कूलों में पहुंचाई जा रही किताबें
नवभारत टाइम्स•
नए सत्र के लिए सरकारी स्कूलों में किताबें पहुंचाई जा रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चारों ब्लॉक के बीआरसी केंद्रों पर किताबें भेजी हैं। कुछ न्याय पंचायत स्तर के स्कूलों में भी किताबें रखी गई हैं। कक्षा चार से आठ तक के छात्रों को विभिन्न विषयों की किताबें मिलेंगी।
ग्रेटर नोएडा में नए शैक्षणिक सत्र के लिए सरकारी स्कूलों में किताबें पहुंच गई हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चारों ब्लॉक के बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) केंद्रों पर किताबें जमा कर दी हैं, जहां से उन्हें न्याय पंचायत स्तर के स्कूलों में भेजा जाएगा। जिन स्कूलों के बीआरसी के करीब हैं, वहां सीधे किताबें पहुंचाई जा रही हैं। विभाग का दावा है कि इस बार शिक्षक खुद किताबें लेने नहीं आएंगे, लेकिन यह देखना बाकी है कि यह व्यवस्था कितनी कारगर साबित होती है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने बताया कि जिले के सरकारी स्कूलों में लगभग 80 हजार छात्र नामांकित हैं। बिसरख और दादरी ब्लॉक में सबसे ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं। अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र के लिए शासन की ओर से किताबों की खेप आ चुकी है। अब तक करीब सात लाख किताबें प्राप्त हुई हैं। डीएम के निर्देश पर किताबों के सत्यापन के लिए एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने अपनी प्रक्रिया पूरी कर ली है। सत्यापन के बाद, किताबों को चारों ब्लॉक के बीआरसी केंद्रों पर पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा, कुछ ब्लॉक में न्याय पंचायत स्तर पर चुने गए स्कूलों में भी किताबें रखी गई हैं, जहां से उन्हें अन्य स्कूलों में वितरित किया जाएगा।कक्षा चार से आठवीं तक के छात्रों के लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित, पर्यावरण अध्ययन, संस्कृत, विज्ञान, भूगोल, स्काउट एंड गाइड और इतिहास की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, कक्षा एक से तीन तक के छात्रों को एनसीईआरटी की किताबें मिलेंगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि सभी छात्रों को उनकी पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री समय पर मिल सके। विभाग इस बार किताबों के वितरण में पारदर्शिता और सुगमता लाने का प्रयास कर रहा है। शिक्षकों को सीधे स्कूल में किताबें न ले जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वितरण प्रक्रिया को और व्यवस्थित किया जा सके। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई व्यवस्था कितनी सफल होती है और छात्रों तक किताबें आसानी से पहुंच पाती हैं या नहीं। इस बार किताबों की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।