Sudha.Shrimali
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n मुंबई: चांदी पर इंपोर्ट सख्ती और भारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर अब इसकी अगली चाल पर है। हाल में कीमतों में तेज गिरावट जरूर आई है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मजबूत औद्योगिक मांग, सप्लाई की कमी और ग्लोबल फैक्टर्स के चलते लंबी अवधि में चांदी फिर तेजी दिखा सकती है। जानकारों का कहना है कि चांदी की कीमतों पर अमेरिका की ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड्स, ग्लोबल इंडस्ट्रियल डिमांड और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसे कई फैक्टर्स असर डालते हैं। इसलिए कभी चांदी बहुत तेजी से ऊपर, तो कभी अचानक तेज गिरावट भी दिखा देती है।
चांदी में गिरावट क्यों?
विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल की गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी है। जब अमेरिका में बॉन्ड पर अच्छा रिटर्न मिलने लगता है तो निवेशक सोना और चांदी जैसे नॉन-इंटरेस्ट असेट्स से पैसा निकालकर बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं। इससे प्रेशियस मेटल्स पर दबाव आता है। दूसरी वजह प्रॉफिट बुकिंग रही। निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसके अलावा चांदी केवल निवेश की धातु नहीं है, बल्कि इंडस्ट्रियल मेटल भी है। जब ग्लोबल ग्रोथ कमजोर दिखती है तो इसकी डिमांड पर असर पड़ता है। इससे भी कीमतों पर दबाव आता है।





