नई दिल्ली : पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ने से देश में महंगाई का जोर बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में दाम अंतरराष्ट्रीय भाव से अब भी कम हैं, लिहाजा तेल मार्केटिंग कंपनियां कीमतें और बढ़ा सकती हैं। वहीं, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ईंधन के दाम में अब तक हुई बढ़ोतरी के चलते खुदरा महंगाई दर करीब 60 बेसिस पॉइंट्स बढ़ सकती है, जो अप्रैल में 3.48% हो गई थी।
कितनी बढ़ोतरी? : 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से घरेलू LPG सिलिंडर 60 रुपये और कमर्शल LPG सिलिंडर 1303 रुपये महंगा हो चुका है। पेट्रोल-डीजल के भाव भी 7.50 रुपये/लीटर बढ़ चुके हैं। भाव कब तक बढ़ते रहेंगे, यह पूछे जाने पर तेल एवं गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'युद्ध शुरू होने के पहले क्रूड ऑयल 60-70 डॉलर प्रति बैरल पर था, जो बाद में 120 डॉलर से भी ऊपर चला गया और अब भी 100 डॉलर के करीब है। LPG का सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस 385 डॉलर से लगभग दोगुना होकर 780 डॉलर प्रति टन हो गया है। दुनिया के स्तर पर पेट्रोल के दाम 22% और डीजल के करीब 27% बढ़े हैं, देश में पेट्रोल में 7.7%, डीजल में 8.6% बढ़ोतरी हुई है।'
कितना बढ़ सकता है भाव? : ग्लोबल रियल टाइम डेटा प्रोवाइडर Kpler के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल का भाव करीब 130 डॉलर/बैरल और डीजल का लगभग 150 डॉलर/बैरल है। एक्साइज ड्यूटी और वैट वगैरह जोड़कर दिल्ली में पेट्रोल का भाव 110 रुपये प्रति लीटर और डीजल का 114 रुपये प्रति लीटर के करीब बनता है। यानी दिल्ली में पेट्रोल करीब 8 रुपये और डीजल 19 रुपये प्रति लीटर कम पर है। इसलिए दाम बढ़ाए जा सकते हैं। हालांकि पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों से क्रूड में जैसी नरमी आई है, आगे भी ऐसा ही रहा, तो इसकी जरूरत शायद नहीं होगी।'
महंगाई का रुझान? : बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'कंस्यूमर प्राइस इंडेक्स में पेट्रोल-डीजल का 4.9% वेट है। इनके दाम अब तक 7.5% तक बढ़ने से महंगाई लगभग 30-40 बेसिस पाइंट्स बढ़ सकती है। इसके बाद कहीं बड़ा असर ट्रांसपोर्टरों के प्राइस बढ़ाने से होगा, जो वे पहले ही करीब 4% बढ़ा चुके हैं। लागत बढ़ने से मैन्युफैक्चरर्स भी उत्पादों के दाम बढ़ाएंगे। इस तरह आने वाले दिनों में महंगाई कुल 60-70 बेसिस पॉइंट्स बढ़ सकती है। हालांकि प्राथमिक असर मई की रिटेल इंफ्लेशन में ही दिख जाएगा।'
महंगा होगा कर्ज? :सबनवीस ने कहा, 'आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की सूरत के चलते इस साल रेट (रीपो रेट) कई बार बढ़ सकते हैं। ऐसा मॉनसून सीजन और खरीफ सीजन के बाद हो सकता है, जब तस्वीर ज्यादा साफ होगी। हालांकि अगर ईंधन के दाम और बढ़ाने से महंगाई ज्यादा बढ़ी तो इससे पहले ही ब्याज दर बढ़ाई जा सकती है।' RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की अगली बैठक जून में होनी है।

