n सोबिंद्र भाटी, ग्रेटर नोएडा
करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले और देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे हाईटेक शहर नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का कोई अता-पता नहीं है। ईंधन संकट के इस दौर में एक तरफ जहां सरकार लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील कर रही है और शहर में आधुनिक ई-बसें चलाने की बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रही है, वहीं पुलिस और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने यहां की जनता को ऑटो माफिया के रहमों-करम पर छोड़ दिया है। हैरानी की बात यह है कि सड़कों पर अवैध रूप से दौड़ रहे ऑटो और डग्गामार वाहनों पर पूरी तरह मेहरबान रहने वाली ट्रैफिक पुलिस, जनता को राहत देने वाली सरकारी बसों और उनके चालकों को प्रताड़ित कर रही है। इस पूरे सिंडिकेट और गुंडागर्दी के आगे स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौन साधे हुए हैं। इस बदहाली को लेकर उत्तर प्रदेश रोडवेज के एआरएम ने पुलिस कमिश्नर और डीएम को पत्र लिखकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
' मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा ' बंद होने के कगार पर
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले लाखों मध्यमवर्गीय लोग लंबे समय से सुरक्षित और किफायती सरकारी बस सेवा की मांग कर रहे थे। प्रशासन ने 5 महीने की तैयारी के बाद गाजियाबाद के तिगरी गोलचक्कर से किसान चौक, पर्थला फ्लाईओवर होते हुए सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन तक 'मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा' का नया रूट तैयार किया। सोमवार को जब यह बहुप्रतीक्षित सेवा शुरू हुई, तो यात्रियों को लगा कि अब ऑटो चालकों की मनमानी लूट और ओवरचार्जिंग से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन इस किफायती सेवा से बौखलाए ऑटो माफिया ने सीधे गुंडागर्दी शुरू कर दी। बस चालकों को खुलेआम धमकियां दी गईं। सुरक्षा के अभाव में पूरी तरह खौफजदा बस स्टाफ और निजी ट्रेवल एजेंसी ने इस रूट पर गाड़ियां चलाने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे यह ड्रीम प्रॉजेक्ट शुरू होते ही बंद होने के कगार पर है।


