क्यों लुभा रही कॉकरोचों की दुनिया

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हॉगवर्ट्स, मिडल-अर्थ और फुलेरा जैसी काल्पनिक दुनियाओं की तरह, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी एक ऐसी दुनिया रच रही है जिसमें लोग रहना चाहते हैं। यह वर्ल्डबिल्डिंग का एक नया रूप है जो हकीकत में बदल रहा है। CJP ने युवाओं की बेचैनी को एक पहचान दी है।

cockroach janata party a unique political world built with the power of worldbuilding

हॉगवर्ट्स, मिडल-अर्थ, फुलेरा और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)। इनमें से एक बाकी जैसा नहीं है, लेकिन फर्क वैसा नहीं जैसा आप सोच रहे। पहले तीन ऐसी काल्पनिक दुनिया हैं, जिन्हें रचने में लेखकों को दशकों लगे। चौथी एक राजनीतिक हलचल है, जिसे बोस्टन में बैठे एक 30 वर्षीय PR छात्र ने महज 72 घंटों में, एक लैपटॉप और कुछ AI टूल्स के सहारे खड़ा कर दिया।

लोगों की चाहत । फिर भी ये चारों एक ही बहस का हिस्सा हैं। ये ऐसी दुनिया बनाते हैं, जिसमें लोग रहना चाहते हैं। अब जो भारत देख रहा है, वह कोई वायरल ट्रेंड नहीं है। यह वर्ल्डबिल्डिंग है, जो कथा-कल्पना से बाहर निकल यथार्थ में उतर आई है। देश की अधिकांश संस्थाएं इसे पहचानने के लिए तैयार नहीं हैं।

वर्ल्डबिल्डिंग क्या है । वह विधा, जो हर टिकाऊ काल्पनिक दुनिया के पीछे होती है। टीवी चैनल, OTT प्लैटफॉर्म और सिनेमा अपनी प्रस्तुतियों के लिए इसका सहारा लेते हैं। इसमें अपने मिथक, चरित्र, आदतें, इतिहास और अनुष्ठान होते हैं। मिडल-अर्थ इसलिए चलता है, क्योंकि टॉल्किन ने उसके लिए ऐसी भाषाएं, इतिहास और शिकायतें तक रच दीं, जो किसी भी चरित्र या कहानी से पहले की हैं।

अपनेपन का अहसास । इसी तरह, हॉगवर्ट्स इसलिए विश्वसनीय बनता है, क्योंकि वहां जादू के नियम, हाउस की प्रतिद्वंद्विताएं और एक छिपा हुआ समानांतर समाज पहले ही स्थापित किया जा चुका है। फुलेरा इसलिए असर छोड़ता है, क्योंकि उसकी बोली, नौकरशाही की लय और छोटे कस्बे की शांत राजनीति मिलकर एक काल्पनिक ग्राम पंचायत को असली पंचायतों से भी ज्यादा परिचित बना देती हैं। दुनिया पहले आती है। कहानी उसकी संरचना से जन्म लेती है। और यही वह चीज है, जिसे अभिजीत दीपके ने जाने-अनजाने में कर दिखाया।

अनोखी पहचान । दीपके ने क्या बनाया? एक नाम, जो अपमान को ही अपनी पहचान बना लेता है - कॉकरोच जनता पार्टी। एक वाक्य में गढ़ा गया स्थापना मिथक कि 'मुख्य न्यायाधीश ने हमें कॉकरोच कहा, तो हम कॉकरोच बन गए।' ऐसे साझा मूल्य, जो पहली नजर में मजाक लगते हैं, लेकिन भीतर से एक पूरी विश्वदृष्टि रचते हैं - धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक।

गलत सवाल । यहां हर तत्व दूसरे से जुड़ा हुआ है। हर प्रतीक भागीदारी का निमंत्रण देता है। यही वह चीज है, जिसे हम 'मीनिंगप्लेक्स' कह सकते हैं - कहानियों, प्रतीकों, मान्यताओं और अनकहे संकेतों का ऐसा सुसंगत जाल, जिसके जरिए लोग समझते हैं कि वे कहां खड़े हैं और किस दुनिया का हिस्सा हैं। CJP कोई घोषणा पत्र नहीं, एक मीनिंगप्लेक्स लेकर आई।

ब्रैंड इसलिए पीछे । अब इसे आज के अधिकांश ब्रैंड पर लागू करके देखिए। अगर ब्रैंड भी फिल्मों और OTT की तरह अपनी एक पूरी दुनिया बनाएं - अपने किरदारों, कहानियों, प्रतीकों और संस्कृति के साथ, तो उनका प्रॉडक्ट खरीदने वाला केवल एक सामान नहीं लेगा, वह उस दुनिया का हिस्सा बन जाएगा। लेकिन, अधिकांश ब्रैंड इसका उल्टा करते हैं।

नाकामी की वजह । यही वजह है कि अधिकांश कॉरपोरेट बदलाव अधूरे रह जाते हैं। नेता नई रणनीति की घोषणा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि संगठन उसका अनुसरण करे। लेकिन, रणनीति से पहले दुनिया बदलनी पड़ती है। CJP इसलिए चली, क्योंकि उसने लोगों को वही दुनिया दिखाई, जिसमें वे पहले से खुद को देख रहे थे।

तीन सबक । राजनीति में CJP ने कोई नई निराशा पैदा नहीं की। उसने बस शिक्षित, बेरोजगार और हमेशा ऑनलाइन रहने वाले युवाओं की मौजूदा बेचैनी को एक दुनिया दे दी। व्यवसाय के लिए सबक AI या सोशल मीडिया की रफ्तार नहीं, बल्कि वर्ल्ड-आर्किटेक्चर का है। अगर कोई दुनिया लोगों के अनुभव से मेल खाती है, तो वे उसे तुरंत अपना लेते हैं। अगर नहीं खाती, तो कोई विज्ञापन बजट उसे बचा नहीं सकता।

एक जैसा अनुभव । मनोरंजन जगत के लिए सबक, CJP ने कहानी को ही वर्ल्डबिल्डिंग बना दिया। कॉकरोच चरित्र है और व्यवस्था खलनायक। कोई भी आकर खुद कहानी लिख सकता है। बेहतरीन फ्रैंचाइजी यही करती हैं। CJP टिकी, क्योंकि उसकी दुनिया और उसमें बसे लोगों के अनुभव एक हैं। यहीं पर आकर अधिकांश चूक जाते हैं।

(लेखक बेंगलुरु स्थित रणनीति और वर्ल्डबिल्डिंग परामर्श फर्म प्राइमलाइज़ के सह-संस्थापक हैं)