दुनिया में कुछ ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिनकी पहचान केवल उनकी उपलब्धियों से नहीं, उनके विनम्र स्वभाव, सादगी और श्रेष्ठ विचारों से होती है। विज्ञान जगत की महान वैज्ञानिक मैरी क्यूरी ऐसी ही प्रेरणादायी महिला थीं। वह नोबेल पुरस्कार पाने वाली पहली महिला और दो बार नोबेल सम्मान प्राप्त करने वाली पहली वैज्ञानिक थीं। एक पत्रकार उनका साक्षात्कार लेने उनके घर पहुंचा। पत्रकार ने मैरी क्यूरी को पहले कभी देखा नहीं था। घर के बाहर गार्डन में साधारण वेशभूषा में एक महिला पौधों को पानी दे रही थी। पत्रकार ने उसे नौकरानी समझकर पूछा, ‘क्या मालकिन हैं?’ महिला ने शांत स्वर में कहा, ‘नहीं, बाहर गई हैं।’ पत्रकार लौटने को हुआ, लेकिन उसने जाते-जाते पूछा, ‘क्या वह आपको कुछ कहकर गई हैं?’ महिला मुस्कराईं और बोलीं, ‘हां, उन्होंने कहा है कि लोगों को उनके वस्त्रों से नहीं, बल्कि उनके विचारों और कर्मों से पहचानना चाहिए।’ इतना सुनते ही पत्रकार समझ गया कि सामने खड़ी महिला स्वयं मैडम क्यूरी थीं। वह शर्मिंदा हो गया। यह घटना सिखाती है कि सच्ची महानता दिखावे में नहीं, सरलता, विनम्रता और श्रेष्ठ चरित्र में बसती है।


