वैश्विक स्तर पर लगातार बदलते हालात, आर्थिक अनिश्चितताओं और क्षेत्रीय संकटों के बीच भारत सरकार ने जिस प्रकार हज यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य व सुविधाओं को प्राथमिकता दी है, वह संवेदनशील और उत्तरदायी शासन का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
यह करोड़ों भारतीयों की आस्था के प्रति सम्मान, समर्पण और भरोसे का प्रतीक भी है। इस साल भारत के लिए कुल 1,75,025 हज कोटा सुनिश्चित किया गया। इसमें से 1,22,518 यात्री हज कमिटी के माध्यम से रवाना हुए। केवल दिल्ली एम्बार्केशन पॉइंट से ही 21,032 यात्री गए, जिनके लिए 54 विशेष उड़ानों का संचालन किया गया। हज यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या से निपटने के लिए विशेष व्यवस्था की गई। सऊदी अरब में भारतीय मिशन और हज अधिकारी लगातार सक्रिय रहे।
भारत और भारतीय प्रथम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 12 वर्षों में वैश्विक स्तर पर अलग पहचान बनाई है। इसकी बुनियाद है अपने नागरिकों की हर दृष्टि से सुरक्षा और भारत का सम्मान। देश की विदेश नीति केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा , निवेश, रक्षा, तकनीक, व्यापार और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का मजबूत माध्यम बन चुकी है।
हाल ही में पीएम मोदी ने UAE, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की महत्वपूर्ण यात्रा की। यह दौरा ऐसे समय हुआ जब दुनिया ऊर्जा संकट, युद्ध जैसे हालात और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रही है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, व्यापार, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारियों को नई मजबूती देना था। UAE यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग, निवेश, सप्लाई चेन, खाद्य सुरक्षा और भारतीय समुदाय से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पहले से मौजूद व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिली। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह यात्रा देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई। इससे कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को स्थिर रखने में सहयोग मिलने की संभावना मजबूत हुई।
टेक्नॉलजी-इनोवेशन को गति
इटली यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' तक उन्नत किया गया। रक्षा निर्माण, समुद्री सुरक्षा, शिक्षा, AI, ग्रीन टेक्नॉलजी और महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर कई समझौते हुए। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जो आने वाले समय में भारत को यूरोप और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाला बड़ा व्यापारिक व रणनीतिक मार्ग बन सकता है। इससे भारत के निर्यात, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक व्यापार क्षमता को नया विस्तार मिलने की उम्मीद है।
नॉर्डिक देशों स्वीडन और नॉर्वे के साथ ग्रीन एनर्जी, डिजिटल तकनीक, ग्रीन हाइड्रोजन, AI और इनोवेशन में सहयोग को गति मिली। वहीं, नीदरलैंड्स के साथ लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह विकास, जल प्रबंधन, कृषि तकनीक और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसका सीधा लाभ भारत के बुनियादी ढांचे, कृषि उत्पादकता और निर्यात क्षेत्र को मिल सकता है। इन पांच देशों की यात्रा का प्रत्यक्ष लाभ भारत को निवेश और आर्थिक सहयोग के रूप में भी दिखाई दे रहा है। अनुमान है कि इन समझौतों और साझेदारियों से आने वाले वर्षों में लगभग 40 अरब डॉलर तक के निवेश व आर्थिक सहयोग का मार्ग खुल सकता है।
आज भारत केवल एक बड़ा बाजार नहीं, वैश्विक रणनीतिक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। जी-20 की सफल अध्यक्षता, वैश्विक मंचों पर बढ़ती भूमिका, आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट नीति, कोविड काल में वैक्सीन मित्रता अभियान, डिजिटल भारत मॉडल और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ने देश की विश्वसनीयता को नई ऊंचाई दी है।
(लेखिका दिल्ली स्टेट हज कमिटी की अध्यक्ष हैं)


