भातखंडे : सुर-ताल को साधेगा योग

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bhatkhande universitys yoga confluence music dance and instrumental arts to get new energy
nNBT न्यूज,लखनऊ

भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में अब संगीत, नृत्य और वाद्य कलाओं के साथ योग का संगम देखने को मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में योगाचार्य की नियुक्ति कर विद्यार्थियों, शिक्षकों के साथ आम नागरिकों के लिए भी योग कक्षाओं की शुरुआत की है।
कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि पहले सेमेस्टर में दो क्रेडिट का योग पाठ्यक्रम पहले से शामिल है। अब परिसर में नियमित सत्र भी शुरू किए गए हैं। इसके तहत प्रतिदिन सुबह 7 से 8 बजे तक खुला (ओपन) सत्र होगा, जो सभी के लिए पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। इसके अलावा, एक विशेष पहल के तहत ऑटिस्टिक बच्चों के लिए खास योग कक्षाएं चलेंगी, जहां योग और संगीत के तालमेल से उनके शारीरिक-मानसिक विकास और सीखने की क्षमता को बेहतर किया जाएगा।

कला विधाओं के हिसाब से तय किए गए आसन : योगाचार्य अंजनी कुमार दुबे के अनुसार, कला के अनुसार अलग-अलग यौगिक क्रियाएं कराई जा रही हैं।

गायन: वोकल कॉर्ड और श्वास प्रणाली के लिए सिंहासन, सर्वांगासन, भुजंगासन, उज्जायी, अनुलोम-विलोम व भ्रामरी प्राणायाम कराए जा रहे हैं। गले की शुद्धि के लिए कुंजल व जलनेति सिखाई जा रही है।

वादन: उंगलियों, कलाई और जोड़ों की लचक के लिए मणिबंध, करतल, कोहनी और स्कंध शक्ति विकासक सूक्ष्म व्यायाम कराए जा रहे हैं, ताकि कलाकार बिना थके देर तक वादन कर सकें।

नृत्य: संतुलन व लचीलेपन के लिए नटराज आसन, ताड़ासन, तितली आसन, कटी चक्रासन, जानु व ग्रीवा शक्ति विकासक क्रियाएं कराई जा रही हैं। गोरक्षासन और उत्कट आसन भरतनाट्यम जैसी शैलियों को साधने में मददगार साबित हो रहे हैं।

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