शेयर बाजार में गिरावट के दौरान 1-2 साल के निवेशकों के लिए सुरक्षित फंडिंग विकल्प

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शेयर बाजार में गिरावट का समय निवेशकों के लिए सोचने का है कि उन्हें अपने पैसे को कहां लगाना चाहिए। खासकर उन लोगों के लिए जो 1 से 2 साल के भीतर निवेश की सोच रहे हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव से कुछ निवेशक घबरा जाते हैं, तो कुछ जल्दबाजी में स्मॉलकैप फंड्स में पैसे लगा देते हैं। लेकिन, यह ध्यान रखना जरूरी है कि कम समय के निवेश में केवल उच्च रिटर्न के पीछे दौड़ना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए ऐसे समय में डायवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन और हाइब्रिड फंड जैसी रणनीतियों पर विचार करना फायदेमंद हो सकता है।

1-2 साल के निवेश के लिए सावधानी बरतना उपयुक्त होता है। किसी भी शेयर या सेक्टर के सस्ते होते हुए भी उनकी कीमतें फिर भी गिर सकती हैं। खासकर स्मॉलकैप शेयरों में। इनकी कीमतों में जल्द बदलाव हो सकता है, जो निवेशकों के लिए चिंताजनक हो सकता है। इसलिए, यदि आपको 12 से 24 महीने के भीतर पैसे की आवश्यकता पड़ सकती है, तो सभी पैसे को एक ही जोखिम में लगाना समझदारी नहीं है।
SBI Multi Asset Allocation Fund एक उत्कृष्ट विकल्प है। यह फंड कम से मध्यम जोखिम वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त है। यह अलग-अलग एसेट क्लास में पैसे लगाता है, जैसे कि इक्विटी, डेट और कमोडिटी/गोल्ड। इसकी सबसे बड़ी विशेषता डायवर्सिफिकेशन है। यदि किसी एक एसेट क्लास में उतार-चढ़ाव आता है, तो दूसरे एसेट क्लास से पोर्टफोलियो को संतुलित किया जा सकता है। फिर भी, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि मल्टी-एसेट फंड भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होते और इसमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

दूसरा विकल्प SBI Equity Hybrid Fund है। यह उन निवेशकों के लिए उचित है जो इक्विटी में कुछ हिस्सा रखना चाहते हैं लेकिन पूरी तरह से जोखिम नहीं लेना चाहते। इन फंड्स में इक्विटी के साथ डेट इंस्ट्रूमेंट्स का भी इस्तेमाल होता है। इसका मुख्य उद्देश्य पोर्टफोलियो को केवल शेयर बाजार की चाल पर निर्भर रहने से बचाना है। अगर बाजार गिरता है तो डेट वाला हिस्सा स्थिरता देता है, जबकि अगर बाजार बढ़ता है, तो इक्विटी हिस्सा ग्रोथ में योगदान कर सकता है।

एक और विकल्प है SBI Arbitrage Opportunities Fund। यदि निवेशक सीधे इक्विटी में ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते, तो इस फंड पर विचार कर सकते हैं। ये फंड कैश और फ्यूचर्स मार्केट के बीच मूल्य के अंतर का लाभ उठाते हैं, जिससे इनका व्यवहार सामान्य इक्विटी फंड के मुकाबले अलग होता है। हालांकि, इसे भी पूरी तरह सुरक्षित निवेश नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि म्यूचुअल फंड में रिटर्न बाजार की स्थितियों और फंड की रणनीति पर निर्भर करता है।

अगर आपके पास एक बड़ी रकम है और आप इसे बाजार की गिरावट से फायदा उठाना चाहते हैं, तो एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध निवेश करने का विकल्प बेहतर है। इसके लिए आप STP यानी Systematic Transfer Plan का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें आप पहले अपनी रकम को किसी उपयुक्त डेट या लिक्विड फंड में रख सकते हैं। फिर तय अंतराल पर एक निश्चित रकम को इक्विटी फंड में ट्रांसफर कर सकते हैं। इससे आप अलग-अलग स्तरों पर खरीदारी कर सकेंगे, जिससे गलत समय पर पूरे पैसे लगाने का खतरा कम होगा।

लेकिन, कुछ फंड्स ऐसे हैं जिनमें 1-2 साल के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। जैसे SBI Small Cap Fund। ये फंड लंबी अवधि में ज्यादा ग्रोथ की संभावना देते हैं, लेकिन इनमें उतार-चढ़ाव भी अधिक होता है। इसलिए इनमें बड़ी रकम लगाना जोखिम भरा हो सकता है। इसी तरह, SBI Contra Fund भी है। ये बाजार में कम लोकप्रिय या विपरीत दिशा में चल रही कंपनियों में निवेश करते हैं। ऐसी रणनीतियों को काम करने में समय लग सकता है, इसलिए इनका आकलन केवल 12-24 महीने में नहीं किया जाना चाहिए।

SBI Focused Equity Fund की बात करें, तो ये सीमित संख्या में चुनी गई कंपनियों पर निर्भर रह सकते हैं, जिससे पोर्टफोलियो में concentration risk बढ़ जाता है। ऐसे फंड लंबे समय तक निवेश के लिए ज्यादा उपयुक्त माने जाते हैं।

अगर आपका लक्ष्य अगले 12 से 24 महीनों में पैसे का उपयोग करना है, तो पूरी रकम इक्विटी में लगाना जोखिम भरा हो सकता है। आपको अपनी जरूरत, जोखिम लेने की क्षमता, आय और मौजूदा निवेश के साथ-साथ पैसे की जरूरत की तारीख को ध्यान में रखकर एसेट एलोकेशन तय करना चाहिए।

निवेशकों को यह नहीं भूलना चाहिए कि म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिम के अधीन होते हैं। पिछले प्रदर्शन से भविष्य के रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। किसी भी फंड में निवेश करने से पहले उसके पोर्टफोलियो, खर्च, जोखिम स्तर, एग्जिट लोड, टैक्स और अपनी निवेश अवधि को ध्यान से चेक करें।

आखिर में, शेयर बाजार की गिरावट को केवल डर का समय न समझें। इसे निवेश रणनीति की समीक्षा का अवसर भी माना जा सकता है। 1-2 साल की छोटी अवधि में आक्रामक स्मॉलकैप निवेश करने के बजाय, डायवर्सिफाइड या हाइब्रिड रणनीति पर विचार करना बेहतर हो सकता है। वहीं, जिन निवेशकों के पास लंबी अवधि का नज़रिया है, वे चरणबद्ध तरीके से इक्विटी में निवेश करने की योजना बना सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिटर्न के लालच में अपने पैसे को जरूरत से ज्यादा जोखिम में न डालें। यह सोच समझकर किया गया निवेश ही सही मायने में लाभदायक साबित होगा।

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