अमीर बनने के 10 गलतियों से बचें: बचत और निवेश के बेहतर तरीके जानें
अमीर बनने के 10 गलतियों से बचें: बचत और निवेश के बेहतर तरीके जानें
NewsPoint•
एक सफल वित्तीय जीवन के लिए केवल ज्यादा कमाई करना ही पर्याप्त नहीं है। आर्थिक सफलता का असली राज आपकी आय को कैसे प्रबंधित करते हैं, इस पर निर्भर करता है। कई बार लोगों की अच्छी सैलरी होती है, लेकिन बावजूद इसके वे आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बन पाते। इसका मुख्य कारण उनकी कुछ आम वित्तीय आदतें होती हैं, जो धीरे-धीरे उनकी बचत और निवेश को नुकसान पहुंचाती हैं। कुछ गलतियां तो तुरंत नजर आ जाती हैं, जैसे क्रेडिट कार्ड से जरूरत से ज्यादा खरीदारी करना। जबकि कई आदतों के नुकसान का अहसास काफी समय बाद होता है, जैसे हर महीने बचत करना लेकिन उसे सही तरीके से निवेश न करना या सैलरी बढ़ने के साथ अपने निवेश की राशि को न बढ़ाना। अगर आप भविष्य में मजबूत आर्थिक स्थिति बनाना चाहते हैं, तो आपको कुछ प्रमुख गलतियों से बचना होगा।
पहली सबसे बड़ी गलती है "जितनी कमाई, उतना ही खर्च"। अगर आपकी पूरी सैलरी हर महीने खर्च हो जाती है, तो आपकी आर्थिक स्थिति में वैसी कोई सुधार नहीं होगा। सैलरी बढ़ने पर खर्च बढ़ाने के बजाय, आपको अपनी बचत और निवेश की राशि भी बढ़ानी चाहिए। इसके लिए एक बजट बनाना और खर्चों पर ध्यान रखना आवश्यक है।दूसरी गलती है "निवेश शुरू करने के लिए सही समय का इंतजार करना"। कुछ लोग सोचते हैं कि जब उनके पास ज्यादा पैसा होगा या बाजार सही अवस्था में होगा, तब वे निवेश करेंगे। लेकिन याद रखें, निवेश में समय काफी महत्वपूर्ण होता है। छोटे निवेश से भी आप लंबी अवधि में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
तीसरी गलती है "महंगा कर्ज लेकर चलना"। एक क्रेडिट कार्ड का बकाया या ज्यादा ब्याज वाला पर्सनल लोन आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज में खत्म कर सकता है। ऐसे कर्ज को लंबे समय तक टालने की बजाय, जल्दी चुकता कर देने की योजना बनानी चाहिए। कर्ज खत्म होने के बाद, उसी पैसे को निवेश में लगाना बेहतर होगा।
चौथी गलती "इमरजेंसी फंड न बनाना" है। अचानक नौकरी जाने, मेडिकल खर्च या वाहन खराब होने जैसी अनियोजित स्थितियों में यदि आपके पास पर्याप्त बचत नहीं है, तो आपको कर्ज लेना पड़ सकता है या अपने निवेश को समय से पहले निकालना पड़ सकता है। इसलिए, अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ महीनों के जरूरी खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाकर रखना समझदारी है।
पांचवीं गलती "अपना पूरा पैसा सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में रखना" है। हालांकि, सेविंग्स अकाउंट में पैसे रखना गलत नहीं है, लेकिन लंबे समय के लक्ष्यों के लिए सभी पैसे को वहीं रखना उचित नहीं हो सकता। महंगाई समय के साथ पैसे की असली खरीद शक्ति को कम कर देती है। इसलिए, अपनी जोखिम क्षमता और लक्ष्य के अनुसार विभिन्न निवेश विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए।
छठी गलती है "बिना लक्ष्य के निवेश करना"। सिर्फ इसलिए किसी निवेश में पैसा लगाना नहीं चाहिए क्योंकि वह लोकप्रिय है या दूसरे लोग उसमें इन्वेस्ट कर रहे हैं। पहले तय करें कि आपका पैसा किस उद्देश्य के लिए है। जैसे, घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई, शादी या रिटायरमेंट जैसी अलग-अलग योजनाओं के लिए अलग-अलग समयसीमा और निवेश रणनीति की जरूरत होती है।
सातवीं गलती "ट्रेंड देखकर निवेश के पीछे भागना" है। किसी शेयर या म्यूचुअल फंड ने पिछले साल शानदार रिटर्न दिया है, इसका मतलब यह नहीं कि आगे भी वही प्रदर्शन जारी रहेगा। पुराने प्रदर्शन को देखकर निवेश करने से आप ऊंची कीमत पर खरीदारी करने की चूक कर सकते हैं। इसलिए रिस्क और समयसीमा को ध्यान में रखना जरूरी है।
अगली गलती है "सैलरी बढ़ते ही लाइफस्टाइल महंगी कर लेना"। जब कोई व्यक्ति अपनी सैलरी बढ़ने पर महंगी कार, बड़ा घर या अन्य चीजों पर खर्च करना शुरू कर देता है, तो इसे लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है। कमाई बढ़ने पर लाइफस्टाइल में सुधार करना ठीक है, लेकिन हर बढ़ोतरी का पूरा फायदा खर्च में बदल देने से भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कमजोर हो सकती है। बेहतर यह होगा कि हर सैलरी इंक्रीमेंट के साथ अपनी बचत और निवेश की मात्रा भी बढ़ाई जाए।
नौवीं गलती "रिटायरमेंट प्लानिंग को टालते रहना" है। रिटायरमेंट भविष्य में कई वर्षों बाद आएगा, लेकिन यदि आप इसकी तैयारी जल्दी शुरू करते हैं, तो यही आपके लिए फायदेमंद होगा। कम उम्र में थोड़े-थोड़े पैसों का निवेश करके आप एक बड़ा फंड बना सकते हैं। यदि आप इसे टालते रहते हैं, तो आगे जाकर आपको और अधिक पैसे निवेश करने की आवश्यकता पड़ेगी।
दसवीं और अंतिम गलती है "अपने फाइनेंशियल प्लान की समीक्षा न करना"। वित्तीय योजना को एक बार बना देने से काम नहीं चलेगा। समय के साथ आपकी आय, खर्च, कर्ज और जीवन के लक्ष्य भी बदलते रहते हैं। इसलिए, समय-समय पर अपने खर्च, बचत, इमरजेंसी फंड और निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूरी है।
अंत में, अधिक सैलरी होना अक्सर अमीर बनने की गारंटी नहीं होती। बहुत सी बार देखा गया है कि ज्यादा सैलरी से बचत और निवेश करना आसान हो जाता है, पर असली फर्क आपकी वित्तीय आदतों पर निर्भर करता है। यदि आपकी कमाई बढ़ने के साथ साथ खर्च भी उसी रफ्तार से बढ़ते रहें, तो आप संपत्ति नहीं बना पाएंगे।
क्या आपको निवेश से पहले पूरा कर्ज चुकता करना चाहिए? यह कर्ज की ब्याज दर और उसकी प्रकृति पर निर्भर करता है। जैसे, क्रेडिट कार्ड जैसे महंगे कर्ज को पहले चुकता करना अच्छा है। वहीं, कम ब्याज वाले कर्ज की स्थिति अलग होती है।
इमरजेंसी फंड में कितना पैसा होना चाहिए, यह हर व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर इसे तीन से छह महीने के जरूरी खर्च के बराबर रखना चाहिए।
क्या सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना गलत है? नहीं, ये रोजमर्रा के खर्चों और इमरजेंसी के लिए जरूरी है। लेकिन लंबे समय के लक्ष्यों के लिए ऐसे पैसे को वहीं रखकर उसकी ग्रोथ को महंगाई से पीछे नहीं रहना चाहिए।
लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन को समझते हुए, जब आपकी आय बढ़ती है और आपके खर्च भी लगातार बढ़ते जा रहे होते हैं, तो इसे ही लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है। इससे बचने का एक तरीका यह है कि सैलरी बढ़ते ही अपनी बचत और निवेश की राशि पहले बढ़ाएं और फिर बाकी रकम खर्च करें।
आखिरी में, निवेश की समीक्षा कितनी बार करनी चाहिए, यह महत्वपूर्ण है। रोज अपने पोर्टफोलियो को देखने की कोई आवश्यकता नहीं है। आमतौर पर साल में एक या दो बार अपनी निवेश की समीक्षा करना ठीक रहता है। बड़े बदलाव जैसे शादी, नौकरी बदलना, बच्चे का जन्म या घर खरीदने के बाद अपनी वित्तीय योजना की समीक्षा करना भी जरूरी होता है।
संक्षेप में, अमीर बनने के लिए केवल ज्यादा कमाई नहीं, बल्कि पैसे को समझदारी से बचाना, सही तरीके से निवेश करना और समय के साथ अपनी फाइनेंशियल रणनीति को अपडेट करना भी आवश्यक है। छोटी-छोटी गलतियां कभी-कभी बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं। वहीं, नियमित बचत, समझदारी से निवेश, कर्ज पर नियंत्रण और अनुशासन आपको धीरे-धीरे एक मजबूत आर्थिक स्थिति की ओर ले जा सकते हैं।