एजेंट के कमीशन पर बीमा कंपनियों को मिलेगी मोहलत?

नवभारतटाइम्स.कॉम•
irdais moratorium on insurance agent commission benefit to customers emphasis on claim transparency
nNBT रिपोर्ट, नई दिल्ली

बीमा क्षेत्र के नियामक IRDAI ने साफ कर दिया है कि बीमा कमीशन पर प्रस्तावित कैपिंग (सीमा) को लागू करने के लिए कंपनियों को थोड़ा वक्त दिया जा सकता है, लेकिन इस सुधार को लंबे समय के लिए टाला नहीं जाएगा। IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ के मुताबिक, बीमा बेचने का खर्च ऐसा होना चाहिए जिससे ग्राहकों को सीधा फायदा मिले और एजेंटों को पहले साल की बिक्री से ज्यादा पॉलिसी लगातार जारी रखने पर इंसेंटिव दिया जाए। इसके अलावा, नियामक ने हेल्थ इंश्योरेंस के क्लेम सेटलमेंट को तेज और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ इसकी बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई है।
अजय सेठ ने ET को दिए इंटरव्यू में बताया कि नियामक उस कंसल्टेशन पेपर पर इंडस्ट्री की राय की जांच कर रहा है, जिसके लिए 25 अक्टूबर तक सुझाव मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि मैनेजमेंट के खर्चों में कटौती को पांच सालों के दौरान चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि किसी भी रियायत को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि यह अनिश्चितकाल की देरी न बने या इससे कोई गलत नतीजे सामने न आएं।

क्लेम सेटलमेंट में पारदर्शिता की कमी पर उन्होंने कहा कि कमीशन को सही करना समस्या के एक पहलू को हल करता है। क्लेम दूसरा पहलू है। उन्होंने बताया कि IRDAI के हेल्थ मास्टर सर्कुलर के तहत 1 घंटे के भीतर कैशलेस मंजूरी और 3 घंटे के भीतर डिस्चार्ज की मंजूरी देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, क्लेम रिव्यू कमिटी की मंजूरी के बिना कोई भी क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। खारिज करने का कारण नीति की विशिष्ट शर्तों का हवाला देते हुए पॉलिसीधारक को इसके बारे में बताया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य बीमा की बढ़ती लागत

हेल्थ इंश्योरेंस के बढ़ते दामों पर बात करते हुए उन्होंने माना कि इसका जेब के अनुकूल होना एक गंभीर चिंता है। उन्होंने कहा, हेल्थ इंश्योरेंस इस वक्त एक नाजुक मोड़ पर है। हमारी कोशिश इसे एक टिकाऊ और बेहतर स्थिति में लाने की है। अजय सेठ ने कहा कि भारतीय बीमा बाजार में निवेश को लेकर काफी दिलचस्पी दिख रही है।