Brahmaputra Dam Conflict Between Development Vs Environment And Local Livelihoods
बांध से चिंता
नवभारतटाइम्स.कॉम•
करीब 2900 किमी लंबे सफर में ब्रह्मपुत्र को कई नाम मिले हैं। चीन के लिए यह यारलुंग सांगपो है, भारत के बड़े हिस्से के लिए ब्रह्मपुत्र और बांग्लादेश के लिए जमुना। यह दुनिया के सबसे बड़े नदी तंत्र में से एक है और फिलहाल इस पर बनने वाले बांध को लेकर विवाद है। अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। यह टकराव उसी स्थिति से उपजा है, जहां हर बार विकास बनाम पर्यावरण व स्थानीय जन-जीवन का सवाल उठ खड़ा होता है।
चीन का मुकाबला । इस प्रॉजेक्ट को चीन के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसने ऊपर तिब्बत में इसी जलधारा पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध बनाने की तैयारी की है। देश में चिंता है कि पेइचिंग इस बांध का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में कर सकता है। इसकी वजह से पूर्वोत्तर में पानी की कमी हो सकती है और अगर कभी अचानक बांध खोला गया तो बाढ़ का खतरा है। अरुणाचल सरकार का कहना है कि सियांग प्रॉजेक्ट से चीनी बांध के संभावित प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।लोगों का आरोप । लेकिन, घाटी में रहने वाले स्थानीय समुदाय विरोध में हैं। उन्हें डर है अपने खेत, घर, जमीन छिन जाने का। उनका आरोप है कि लोगों की सहमति बिना सर्वे किया गया। पानी में सब कुछ डूब जाने के इसी दर्द की वजह से मध्य प्रदेश की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और आंध्र की पोलावरम परियोजना के खिलाफ भी विरोध हुए।
आम भागीदारी । गंगा से लेकर कावेरी तक, बांधों को लेकर कुछ जायज चिंताएं हैं। हालांकि डैम की जरूरत को नजरअंदाज नहीं कर सकते और व्यावहारिक रूप से यह भी संभव नहीं है कि बांध बने और उसका पर्यावरण व लोगों पर बिल्कुल असर न पड़े। तो रास्ता बीच का निकालना पड़ेगा, जहां नुकसान न्यूनतम हो। किसी भी परियोजना की मंजूरी से पहले स्थानीय लोगों को पूरी जानकारी दी जानी चाहिए और योजना में जहां तक संभव हो, उन्हें शामिल किया जाए। जनजातीय आबादी का केवल पुनर्वास काफी नहीं है, उनकी कला-संस्कृति को संरक्षित करने के उपाय भी होने चाहिए। और यह सब समय पर हो।
निगरानी और सुधार । फ्रांस ने कुछ साल पहले अपने दो बड़े हाइड्रो-इलेक्ट्रिक डैम को तोड़ दिया था, क्योंकि वे आज के सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इसी तरह अमेरिका ने Penobscot नदी पर बने दो बांधों को हटाया और बाकियों में जरूरी सुधार किए, जिससे इको-सिस्टम बेहतर हुआ। ये उदाहरण बताते हैं कि लगातार निगरानी और बदलाव जरूरी हैं। निगरानी की व्यवस्था स्वतंत्र हो और इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।