नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

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नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है
मैं पहली बार 2003 में भारत आया था। उस समय मैं उनके बारे में ज्यादा नहीं जानता था, लेकिन नरेंद्र मोदी पहले ही दो साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके थे। यह विचार मेरे मन में तब आया, जब मैंने सुना कि उन्होंने सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। किसी भी लोकतंत्र में यह बहुत लंबा समय है। क्रिकेट की भाषा में कहें तो यह एक पूरा करियर और उससे भी अधिक है। ब्रिटेन में, जहां से मैं आता हूं, 2014 से अब तक छह प्रधानमंत्री आ-जा चुके हैं। इसलिए, एक जीवंत लोकतंत्र में इतने लंबे समय तक पद पर बने रहना वाकई असाधारण है।

मैंने जीवन का एक बड़ा हिस्सा भारत आते हुए बिताया है। मैंने यहां क्रिकेट खेला, देशभर में यात्रा की, असाधारण लोगों से मिला, जंगलों में समय बिताया और दोस्त बनाए। बाहरी होने के बावजूद मैंने भारत को बहुत करीब से बदलते देखा है।
टूट चुका है संकोच

आज जो बात मुझे सबसे अधिक प्रभावित करती है, वह कोई सड़क, इमारत या नीति नहीं। वह है देश में हर तरफ साफ महसूस होने वाला आत्मविश्वास। यह कोई घमंड का भाव नहीं, बल्कि अपनी तकदीर और भविष्य में एक सुखद, सकारात्मक आत्मविश्वास है।

जब मैं पहली बार भारत आया, तब मुझे पता था कि यह असीम प्रतिभा वाला विशाल देश है। लेकिन, एक तरह का संकोच भी था, जिससे ऐसा लगता मानो लोगों को अपनी पूरी क्षमता का अहसास नहीं। आज स्थिति अलग है। आज के भारतीय यह कहने में कहीं अधिक तत्पर दिखते हैं, 'हम यह कर सकते हैं।' वे बड़ा सोचते हैं, कड़ा मुकाबला करते हैं। बिना अहंकारी हुए अपनी बात दृढ़ता से रखते हैं। वे खुद से और अपने देश से अधिक उम्मीदें रखते हैं।

मैंने इसे खेलों में बहुत साफ देखा है। भारतीय क्रिकेट का ही उदाहरण लीजिए। जब मैं पहली बार भारत आया, तब यहां बेहतरीन खिलाड़ी और खेल के प्रति भारी जुनून था। लेकिन, अधिकांश सफलता बेहद प्रतिभाशाली सुपरस्टार्स के एक छोटे-से समूह पर टिकी होती थी। आज भारतीय टीमों की गहराई असाधारण है। बेंच पर बैठी एक टीम भी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम को हरा सकती है। युवा खिलाड़ी इस विश्वास के साथ आते हैं कि वे सर्वोच्च स्तर पर खेलने के हकदार हैं। फिटनेस, तैयारी और प्रफेशनलिज्म के मानक पूरी तरह बदल चुके हैं।

पुरुषों की टीम तो हमेशा से मजबूत रही है, लेकिन महिला क्रिकेट को यहां तक पहुंचते देखना विशेष रूप से सुखद है। पिछले साल विश्व कप में उनकी जीत इसी प्रगति का उदाहरण है। भारत क्रिकेट की महाशक्ति है, इसलिए जब यहां महिला क्रिकेट आगे बढ़ता और सफल होता है, तो इसका प्रभाव भारत की सीमाओं से कहीं आगे महसूस किया जाता है। मैं एथलेटिक्स, निशानेबाजी, कुश्ती, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, हॉकी, टेनिस में भी भारतीय एथलीटों को दुनियाभर में अपनी पहचान बनाते हुए देख रहा हूं। उन खेलों के पोडियम और फाइनल में भारतीय नाम सामने आ रहे हैं, जहां वे पहले बहुत कम दिखते थे। विभिन्न विधाओं में भारत का हालिया प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि खेल का दायरा कितना विस्तृत हुआ है।

युवाओं में आत्मविश्वास

ऐसी चीजें अचानक या अपने-आप नहीं होतीं। इसके लिए बेहतर सुविधाओं, बेहतर प्रणालियों और एक ऐसी संस्कृति की जरूरत होती है, जो युवाओं को विश्वास दिलाए कि वे सर्वोच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। भारत में एक खेल संस्कृति आकार ले रही है और खेलों के प्रति पीएम मोदी के अपने जुनून ने निश्चित रूप से इसे गति देने में मदद की है।

इसका असर आप आम जनजीवन में भी देख सकते हैं। 'फिट इंडिया' के लिए प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान ने देशभर में बदलाव को प्रेरित किया और जागरूकता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। युवा भारतीय मैराथन दौड़ रहे हैं, फिटनेस के नए तौर-तरीके अपना रहे हैं और खुद को उन तरीकों से चुनौती दे रहे हैं जो एक पीढ़ी पहले असामान्य लगते थे।

मुझे यह जानकर भी बहुत उत्सुकता हुई कि पीएम मोदी खुद योग का अभ्यास करते हैं। मैं उनसे मिल चुका हूं और उनकी ऊर्जा को देख चुका हूं, लेकिन यह जानकर कि योग उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। यह बेहद भारतीय भी है और साथ ही बहुत आधुनिक भी। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि योग दुनियाभर में इतनी दूर तक पहुंच गया है। 2014 में संयुक्त राष्ट्र में पीएम मोदी द्वारा पहली बार प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब दुनियाभर में मनाया जाता है।

आम जीवन में तकनीक

भारत मनोवैज्ञानिक रूप से ही नहीं, भौतिक रूप से भी बदला है। हवाई अड्डे बदल गए हैं। सड़कें और मेट्रो बदल गई हैं। होटल और सेवा के मानक बदल गए हैं। पहले मेरे देश में दोस्त मुझसे भारत की गर्मी, भीड़ और खाने के बारे में पूछते थे। अब वे भारत द्वारा भेजी गई कोविड-19 वैक्सीन, भारत के स्टार्टअप्स, चांद पर लैंडिंग और डिजिटल पेमेंट्स की बातें करते हैं। यहां लोग जिस तरह तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, वह अद्भुत है। यहां तक कि रेहड़ी-पटरी वाले भी QR कोड के जरिए कैशलेस पेमेंट ले रहे हैं। ऐसी चीजें दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भविष्य की बातें लगेंगी, लेकिन वे भारत में रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं।

भारत अब बड़े स्तर पर सोचने में भी बहुत सहज हो गया है। मैं विशेष रूप से गुजरात के बारे में सोचता हूं। यहां दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम और दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। आप छोटी सोच रखकर इतने बड़े पैमाने पर चीजें नहीं बना सकते। राजनीति में पीएम मोदी के बारे में चाहे किसी की कोई भी राय हो, उनमें बड़े पैमाने और संभावनाओं के नजरिए से सोचने की स्वाभाविक प्रवृत्ति दिखाई देती है।

मैंने यही प्रवृत्ति उस तरीके में भी देखी है जिससे भारत दुनिया में अपनी स्थिति और भूमिका की बात करता है। भारत नेतृत्व करना चाहता है, प्रतिस्पर्धा करना चाहता है, निर्माण और नवाचार करना चाहता है और चाहता है कि उसकी आवाज सुनी जाए।

प्रकृति मेरे दिल के बेहद करीब है। मैंने काजीरंगा में समय बिताया है और मैं गैंडों के संरक्षण को लेकर बहुत भावुक हूं। मैंने भारत के वन्य जीवों की रक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों को देखा है और इसकी दिल से सराहना करता हूं। भारत ने अपने गैंडों और बाघों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। फिर चीतों की वापसी हुई, एक ऐसी परियोजना जिसने पूरे देश की कल्पना और उत्साह को जगा दिया। मैंने गुजरात के दुर्लभ एशियाई शेरों के संरक्षण के बारे में भी जाना है।

जब मैं पीएम मोदी से मिला, तो वन्यजीवों के प्रति उनका उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। हमने चीतों को जंगल में छोड़े जाने को लेकर पूरे उत्साह से बात की। उन्होंने 'इंटरनैशनल बिग कैट अलायंस' की स्थापना में भी मदद की है, जिसमें भारत बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए दुनियाभर के देशों को एक मंच पर लाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

आज के भारत के बारे में यह बात मुझे बहुत ज्यादा आकर्षक लगती है। वही देश जो तेज आर्थिक और औद्योगिक विकास की राह पर अग्रसर है, वह जानवरों की रक्षा और अपनी प्राकृतिक धरोहर को सहेजने के प्रति भी उतना ही गहराई से समर्पित है।

परंपरा व आधुनिकता का मेल

2022 में, पीएम मोदी से एक बेहद आत्मीय पत्र मिलने के बाद मैंने एक पोस्ट लिखी थी कि 2003 में भारत में पहला कदम रखने के बाद से हर यात्रा के साथ मुझे इस देश से और अधिक प्यार होता गया है। मैंने यह भी कहा था कि जब मुझसे पूछा जाता है कि मुझे भारत के बारे में सबसे ज्यादा क्या पसंद है, तो मेरा जवाब बहुत आसान होता है- यहां के लोग।

भारतीयों के बारे में सबसे ज्यादा पसंद आने वाली बातों में से एक यह है कि आधुनिक होने का मतलब कम भारतीय होना नहीं रहा। मैं प्राचीन मंदिरों और परंपराओं को दुनिया की सबसे उन्नत तकनीकों के साथ सहजता से कदमताल करते देख सकता हूं। मैं युवा भारतीयों को परिवार, आस्था, त्योहारों और प्रकृति के प्रति अपने गहरे जुड़ाव को बनाए रखते हुए भविष्य की ओर बढ़ते देख सकता हूं। निश्चित रूप से, परंपरा और आधुनिकता- दोनों को एक साथ जोड़ने के पीएम मोदी के दृष्टिकोण ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।

25 वर्ष एक असाधारण पड़ाव है। मैं पीएम मोदी को इस यात्रा के लिए बधाई देना चाहता हूं और उनके अच्छे स्वास्थ्य व कई और वर्षों की जनसेवा की कामना करता हूं। मैं भारत को भी शुभकामनाएं देता हूं क्योंकि वह एक ऐसे अध्याय में प्रवेश कर रहा है जो मेरे विचार से और भी अधिक रोमांचक होने वाला है।

मैं पहली बार एक युवा क्रिकेटर के रूप में भारत आया था। दो दशक से अधिक समय बाद भी मुझे ऐसा लगता है कि मैं जब भी लौटता हूं, कुछ नया खोज रहा होता हूं। आज मैं जिस भारत को देख रहा हूं, वह एक ऐसा देश है जो जानता है कि उसे कहां जाना है और उसे विश्वास है कि वह वहां पहुंच सकता है। इस यात्रा का साक्षी बनना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव होगा।

(लेखक इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेट कप्तान हैं)

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