Signs Of The Times Identifying Right wrong And The Path To Societal Change
सही-ग़लत की पहचान को समझें समय के संकेत
Contributed by: आचार्य रूपचंद्र|नवभारतटाइम्स.कॉम•
हर समाज में उथल-पुथल का दौर आता है। यह समय के बदलने का संकेत है। इसके भीतर बदलाव की संभावनाएं छिपी होती हैं। कभी यह बदलाव हिंसक क्रांति का रूप ले लेता है, तो कभी विचारों और चेतना के स्तर पर समाज को नई दिशा देता है। भारतीय परंपरा में मन के बदलाव यानी मनस-क्रांति को विशेष महत्व मिला है।
किसी भी बड़े बदलाव की शुरुआत मन से होती है। विचार मन में जन्म लेते हैं और संकल्प व पुरुषार्थ के सहारे व्यवहार में उतरते हैं। भारतीय परंपरा में राम और कृष्ण के प्रसंगों को केवल शत्रु पर विजय की कहानियों के रूप में नहीं, अन्याय और मनुष्य विरोधी शक्तियों के अंत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। बाद के दौर में महावीर, बुद्ध, महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण ने अपने-अपने तरीके से समाज को बदलने की राह दिखाई। सत्य, अहिंसा, नैतिकता और जनभागीदारी उनकी शक्ति बने। उनके प्रयासों का मूल भाव मनुष्य को बेहतर बनाना और समाज को अधिक न्यायपूर्ण बनाना था।यह समय जागने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का है। आज कुछ विचार जाने-अनजाने समाज में फूट और नफरत बढ़ा रहे हैं। हमें समाज को ऐसी सोच से बचाने और सबको साथ लेकर चलने की जरूरत है। इसके लिए ऐसे समाज के निर्माण की पहल करनी होगी, जहां सभी को समान अवसर और सम्मान मिले। इसकी शुरुआत हम अपने भीतर से कर सकते हैं। नफरत, निराशा और हताशा से बाहर निकलकर हमें आपसी प्रेम, विश्वास और संवाद के रास्ते खोलने होंगे। जब हम अपने विचारों में सकारात्मक बदलाव लाएंगे, तो समाज में भी नई सोच और चेतना का संचार होगा।