ईश्वर की खोज

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the search for god saint eknaths lesson household duties are true devotion
एक बार संत एकनाथ के पास एक व्यक्ति पहुंचा। वह भगवान की सेवा और साधना करना चाहता था। उसने विनम्र होकर कहा, ‘महाराज! कृपया मुझे ऐसा मार्ग बताइए, जिससे मेरा जीवन सार्थक हो सके।’ संत एकनाथ ने पूछा, ‘क्या तुम अपने घर के कर्तव्यों को पूरी तरह निभाते हो?’ व्यक्ति बोला, ‘मेरा विवाह हो चुका है और मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं।’ संत ने पूछा, ‘क्या तुमने अपनी पत्नी से साधना के लिए घर छोड़ने की अनुमति ली है?’ बोला, ‘नहीं महाराज। जब मैं घर से निकला, तब पत्नी सो रही थी। उसी समय मेरी छोटी बच्ची जाग गई और रोने लगी। पत्नी ने उसे सीने से लगाकर चुप तो करा दिया। लेकिन मुझे डर था कि वह कहीं जाग गई, तो मुझे रोक देगी, इसलिए मैं चुपचाप घर छोड़ आया’। संत एकनाथ ने करुणा से कहा, ‘वत्स! जिस भगवान की सेवा करने तुम यहां आए हो, वह तुम्हारे घर में ही है। पत्नी और बच्चों को छोड़कर की गई साधना कैसी? पहले अपने घर के भगवान की सेवा करो और अपने कर्तव्यों को प्रेम से निभाओ।’ व्यक्ति को समझ आ गया कि ईश्वर की खोज संसार से भागने में नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को प्रेम, ईमानदारी और करुणा से निभाने में है।