Everest Under Threat Ice Melting Due To Human Activities Pollution Increasing
ख़तरे में एवरेस्ट
नवभारतटाइम्स.कॉम•
दिलीप लाल
एवरेस्ट की चोटी कभी इंसानी हिम्मत की सबसे बड़ी परीक्षा हुआ करती थी। सबके बस में नहीं था इसे फतह करना। लेकिन, हालात बदले और आज स्थिति यह है कि हर साल औसतन 700 से हजार लोग चढ़ाई की कोशिश करते हैं और इनमें से तमाम सफल भी हो जाते हैं। इस भीड़ का नतीजा है कि एवरेस्ट बेस कैंप एक छोटे शहर जैसा नजर आने लगा है। यहां गर्म पानी, वाई-फाई, कॉफी और यहां तक कि गर्म फर्श वाले टेंट भी मिलते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुविधाओं को चलाने के लिए साल 2023 में करीब 824 एलपीजी सिलिंडर, 18,935 लीटर केरोसिन और 5,130 लीटर पेट्रोल इस्तेमाल हुआ। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि मानवीय गतिविधियों से हर साल लगभग 30 लाख किलो बर्फ पिघल रही है। अध्ययन के दौरान 1991 से 2023 तक के सैटेलाइट आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। पता चला कि बेस कैंप का तापमान ग्लेशियर के अन्य हिस्सों की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ा। सबसे ज्यादा चिंता मानव गंदगी को लेकर है। रिसर्च में अनुमान लगाया गया कि बेस कैंप पर हर दिन 6 हजार लीटर यूरिन निकलता है और इसका बड़ा हिस्सा सीधे ग्लेशियर में चला जाता है। इस गंदगी से ही हर साल खुम्बू ग्लेशियर की करीब 154 टन बर्फ पिघल जाती है। और बीमारी का खतरा अलग है, क्योंकि इन ग्लेशियरों से ही तमाम नदियां निकलती हैं।