किलोमीटर पूरा करने के चक्कर में सड़कों पर खाली दौड़ती हैं सिटी बसें

नवभारतटाइम्स.कॉम
noidas e buses run empty on roads to complete kilometers passengers not getting convenience
nNBT रिपोर्ट, नोएडा

वर्षों के लंबे इंतजार के बाद नोएडा वासियों को सुगम पब्लिक ट्रांसपोर्ट देने के दावे के साथ शुरू की गई ई-बस सेवा अब अपने संचालन मॉडल को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। यात्रियों को सुविधाएं देने के बजाय यह सेवा महज किलोमीटर का कोटा पूरा करने का जरिया बनती दिख रही है। वजह है नोएडा अथॉरिटी और UPSRTC के बीच हुआ किलोमीटर आधारित एमओयू , जिसके कारण बस चालकों को सवारी बैठाने से ज्यादा बस दौड़ाकर किलोमीटर पूरे करने की जल्दी रहती है।
सवारी मिले न मिले, अथॉरिटी भरेगी बिल: करीब ढाई महीने पहले शुरू हुई इस ई-बस सेवा की अधिकतर बसें सड़कों पर खाली दौड़ती नजर आ रही हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट, सेक्टर-52 और नोएडा सिटी सेंटर जैसे व्यस्त इलाकों में भी स्थिति यही है। एमओयू की शर्तों के मुताबिक बसों का भुगतान प्रति किलोमीटर के हिसाब से होता है। एक ई-बस को रोजाना 200 किमी चलाने पर 65 रुपये प्रति किमी की दर से भुगतान किया जाता है। यानी एक बस का मासिक खर्च लगभग 4 लाख रुपये आता है।

पड़ेगा बोझ: टिकट बिक्री से जितनी कमाई होती है, उसे काटकर बाकी का पूरा घाटा नोएडा अथॉरिटी वहन करती है। एमओयू में न्यूनतम यात्री संख्या की कोई शर्त ही शामिल नहीं की गई है। यही कारण है कि ऑपरेटर और ड्राइवरों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बस में यात्री हैं या नहीं, उनका पूरा ध्यान केवल किलोमीटर का दायरा पूरा करने पर रहता है।