nNBT न्यूज, लखनऊ : पुस्तकालय सिर्फ शांत अध्ययन का ठिकाना भर नहीं हैं, बल्कि ये ज्ञान और चेतना से समृद्ध समाज की मजबूत नींव तैयार करते हैं। यह बात डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पुस्तकालयाध्यक्ष मनीष कुमार वाजपेयी ने शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित पांचवें गोमती पुस्तक महोत्सव में कहीं। इस दौरान किताबों की सुलभता और पढ़ने की संस्कृति पर विमर्श भी हुआ।
उत्तर प्रदेश पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष व सचिव विनोद कुमार मिश्रा की अध्यक्षता और मनीष वाजपेयी के समन्वय में आयोजित सत्र में विशेषज्ञों ने पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण पर बल दिया। बीबीएयू के पुस्तकालय विभागाध्यक्ष डॉ. शरद सोनकर ने तकनीक के जरिए छात्रों में पढ़ने की ललक जगाने की बात कही, तो सीएसआईआर के वैज्ञानिक रमेश गुप्ता ने किताबों को चहारदीवारी से निकालकर मेलों और स्टॉलों के जरिए जन-जन तक ले जाने का सुझाव दिया। विनोद कुमार मिश्रा ने ग्रामीण इलाकों में पब्लिक लाइब्रेरी खोलने और सदस्यता नियम आसान बनाने की पैरवी की।बच्चों की मस्ती और रचनात्मकता : महोत्सव के बाल कॉर्नर में 3,500 से अधिक बच्चों ने विविध गतिविधियों में भागीदारी की। यहां कठपुतली के जरिए कहानी वाचन, वैदिक गणित लैब, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग सत्र और सेबी की वित्तीय जागरूकता क्विज आकर्षण का केंद्र रहे। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की कार्यशाला में नन्हे रचनाकारों ने कहानियां गढ़ीं, तो लालबाग गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्राओं ने पारंपरिक कजरी लोक नृत्य पेश कर वाहवाही बटोरी।
'नदी ने क्या याद रखा' : फिल्मकार दीपिका चतुर्वेदी के संयोजन में ‘नदी ने क्या याद रखा’ विषय पर विशेष संवाद हुआ। इसमें कलीनगर (पीलीभीत) के एसडीएम प्रमेश कुमार ने गोमती के उद्गम स्थल, जैव विविधता, नदी स्वच्छता, घाटों के जीर्णोद्धार और नदी संरक्षण से स्थानीय रोजगार सृजन के पहलुओं पर अनुभव साझा किए।