अजमेर जेल से 1283 कॉल और 50 लाख का लेनदेन: नशे की गोलियों की सप्लाई का खुलासा

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अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की सप्लाई और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का एक बड़ा मामला सामने आया है। जेल प्रशासन की जांच में पता चला है कि जेल के अंदर से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किए गए, और इस नंबर से जुड़े बैंक खाते में करीब 50 लाख रुपए का लेनदेन हुआ है। एक बंदी की शिकायत के बाद शुरू हुई इस जांच में जेल प्रहरी महिपाल मंगलोदा की रिपोर्ट पर सिविल लाइंस थाना पुलिस ने FIR दर्ज की है। FIR में करण सिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज के नाम हैं, जो पहले जेल में बंद थे और अब जमानत पर बाहर हैं। पुलिस अब जेल से हुए फोन कॉल और बैंक लेनदेन के बीच के संबंध का पता लगाने में जुटी है।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब जेल प्रशासन को एक कैदी ने शिकायत की। शिकायत के बाद जब जेल प्रशासन ने अपने स्तर पर जांच की, तो एक चौंकाने वाली बात सामने आई। जेल के अंदर से एक खास मोबाइल नंबर पर 1283 बार फोन कॉल किए गए थे। यह कोई एक-दो बार की बात नहीं थी, बल्कि कई दिनों तक लगातार इस नंबर पर संपर्क किया गया। रिकॉर्ड्स बताते हैं कि एक दिन में कम से कम 3 बार और ज्यादा से ज्यादा 29 बार तक कॉल किए गए। यह दिखाता है कि जेल के अंदर से इस नंबर पर कितनी बार बात की गई।
जांच में पता चला कि यह मोबाइल नंबर श्रीनगर थाना क्षेत्र के कनाखेड़ी निवासी जयराम रावत के नाम पर दर्ज है। इसके बाद पुलिस और जेल प्रशासन ने इस नंबर से जुड़े बैंक खाते की भी पड़ताल की। जब बैंक स्टेटमेंट की जांच की गई, तो होश उड़ाने वाली जानकारी सामने आई। 1 जनवरी 2024 से 20 अप्रैल 2026 के बीच इस खाते में कुल 49 लाख 79 हजार 967 रुपए जमा हुए थे। यानी, करीब 50 लाख रुपए का यह बड़ा लेनदेन इस मामले को और भी गंभीर बना देता है। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी रकम किसने और क्यों जमा कराई। क्या जेल से किए गए इन फोन कॉल्स का इस पैसे के लेन-देन से कोई सीधा संबंध था, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।

इस मामले में नशे की गोलियों की सप्लाई का आरोप भी लगा है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि जेल के अंदर प्रतिबंधित नशीली दवाएं कैसे पहुंचाई जाती थीं और इसमें जेल के बाहर के लोगों की क्या भूमिका थी। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि जेल में बंद कैदी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कैसे कर पा रहे थे, जबकि जेल में मोबाइल फोन ले जाना या इस्तेमाल करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। जेल से एक ही नंबर पर 1283 बार कॉल किए जाने का मामला सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि जेल के अंदर से इतनी बड़ी संख्या में फोन कॉल कैसे किए गए। जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल वर्जित है, फिर भी इतने सारे कॉल होना सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है। पुलिस अब कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और आरोपियों के संपर्कों की जानकारी को एक साथ जोड़कर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की कोशिश कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरे खेल के पीछे कौन लोग हैं और उनका क्या मकसद है।

फिलहाल, सिविल लाइंस थाना पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। जांच में सामने आए बैंक रिकॉर्ड और कॉल डिटेल को बहुत महत्वपूर्ण सबूत माना जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि 49.79 लाख रुपए के इस बड़े लेनदेन में और कौन-कौन से बैंक खाते जुड़े हुए हैं और यह पैसा कहां से आ रहा था। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, उम्मीद है कि जेल के अंदर और बाहर सक्रिय इस पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा और इसमें शामिल लोगों के चेहरे सामने आएंगे। यह मामला जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है, जिसकी गहन जांच की जा रही है।

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