975 करोड़ का आयकर नोटिस: गोविंदगढ़ के दर्जी रेखराज के नाम पर फर्जी कंपनियां, जांच शुरू
975 करोड़ का आयकर नोटिस: गोविंदगढ़ के दर्जी रेखराज के नाम पर फर्जी कंपनियां, जांच शुरू
NewsPoint•
गोविंदगढ़ के एक साधारण दर्जी, रेखराज ठाड़ा, को आयकर विभाग से करीब 975 करोड़ रुपये के टैक्स रिकवरी का नोटिस मिलने से हड़कंप मच गया है। 15 हजार रुपये मासिक कमाने वाले रेखराज को सूरत की दो डायमंड कंपनियों का डायरेक्टर बताकर यह भारी-भरकम राशि वसूली का नोटिस भेजा गया है। रेखराज का दावा है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं चलाई और न ही वे गुजरात गए हैं, जिससे यह मामला दस्तावेजों के दुरुपयोग और वित्तीय धोखाधड़ी की ओर इशारा कर रहा है।
यह चौंकाने वाली घटना 13 अगस्त 2026 को तब सामने आई जब रेखराज को गुजरात के सूरत से आयकर विभाग का एक नोटिस मिला। इस नोटिस में उन्हें 'रूप रजत डायमंड प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी का डायरेक्टर बताया गया था। नोटिस के अनुसार, उन पर 974 करोड़ 97 लाख 25 हजार 457 रुपये की टैक्स रिकवरी निकाली गई थी। इतनी बड़ी रकम का नोटिस देखकर रेखराज और उनके परिवार के होश उड़ गए। रेखराज, जो गोविंदगढ़ में टेलरिंग का काम करते हैं और जिनकी मासिक कमाई लगभग 15 हजार रुपये है, के लिए यह राशि एक खगोलीय आंकड़ा थी। उन्होंने तुरंत इस मामले की पड़ताल शुरू कर दी।रेखराज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं चलाई और न ही वे कभी गुजरात गए हैं। उनका कहना है कि वे सालों से सिलाई का काम करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इतनी बड़ी रकम के कारोबार और टैक्स देनदारी से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इस नोटिस के बाद, परिवार ने एक परिचित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से संपर्क किया। CA की मदद से जब संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई, तो एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। रेखराज के नाम एक और कंपनी, 'जय बाबेरी डायम प्राइवेट लिमिटेड', में भी डायरेक्टर के तौर पर दर्ज पाया गया।
दो कंपनियों में अपना नाम डायरेक्टर के रूप में देखकर रेखराज को गहरा शक हुआ कि किसी ने उनके दस्तावेजों या पहचान का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इन कंपनियों के बारे में पहले कभी कोई जानकारी नहीं थी। अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके नाम से ये कंपनियां कैसे दर्ज हुईं और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में इतनी बड़ी टैक्स देनदारी उनके नाम पर कैसे आ गई।
इस गंभीर मामले को लेकर रेखराज ने पीसांगन थाने में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज करने के बजाय उनका परिवाद (शिकायत) लिया। इसके बाद, रेखराज ने अजमेर एसपी कार्यालय का रुख किया और वहां के अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने अपनी शिकायत में अपने नाम और पहचान के कथित दुरुपयोग की गहन जांच की मांग की है। अजमेर एसपी कार्यालय में, रेखराज ने एडिशनल एसपी ग्रामीण लालचंद कायल को मामले की जानकारी दी। अधिकारी ने मामले की जांच का आश्वासन दिया और परिवाद दर्ज कर लिया। अब पुलिस इस बात की जांच करेगी कि रेखराज के नाम से कंपनियों में डायरेक्टर का पद कैसे दर्ज हुआ और इन कंपनियों के माध्यम से किस तरह का कारोबार किया गया।
आयकर नोटिस में करीब 975 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी का उल्लेख होने के कारण इस मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है। यदि यह सच है कि रेखराज के दस्तावेजों का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना किया गया है, तो यह पहचान संबंधी दस्तावेजों के दुरुपयोग और एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी का मामला हो सकता है। जांच के दौरान यह भी पता चल सकता है कि इन कंपनियों के गठन और इनके बैंकिंग लेनदेन में किन लोगों की भूमिका रही है। फिलहाल, रेखराज और उनका परिवार इस उम्मीद में है कि जांच के जरिए पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। पुलिस और संबंधित सरकारी विभागों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कंपनियों में उनका नाम किस प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया और 974 करोड़ 97 लाख 25 हजार 457 रुपये की टैक्स देनदारी उनके नाम पर क्यों दिखाई गई। इस अनोखे मामले ने स्थानीय स्तर पर भी लोगों को हैरान कर दिया है और हर कोई इस पहेली के सुलझने का इंतजार कर रहा है। यह घटना इस बात का भी संकेत देती है कि किस तरह से पहचान की चोरी और धोखाधड़ी के मामले आम लोगों को भी गंभीर मुश्किलों में डाल सकते हैं।