चमोली का बैरासकुंड महादेव मंदिर: रावण की तपस्थली और शिव का प्राचीन धाम
चमोली का बैरासकुंड महादेव मंदिर: रावण की तपस्थली और शिव का प्राचीन धाम
NewsPoint•
चमोली, उत्तराखंड के कण-कण में बसी देवभूमि की एक और अद्भुत कहानी सामने आई है। चमोली जिले में स्थित श्री बैरासकुंड महादेव मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और प्रकृति का संगम है। यह मंदिर अलकनंदा और नंदाकिनी नदियों के संगम नंदप्रयाग से करीब 20 किलोमीटर दूर है। यहां आकर भक्तों को सुकून और भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस मंदिर की महिमा बताते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है। उन्होंने लिखा, “चमोली जिले में मौजूद श्री बैरासकुंड महादेव मंदिर, भगवान शिव को समर्पित एक पुराना और मशहूर शिव धाम है। माना जाता है कि लंका के राजा रावण ने यहां भगवान शिव की बहुत कड़ी तपस्या की थी। इस पवित्र जगह का जिक्र स्कंद पुराण में भी मिलता है। चमोली आने पर श्री बैरासकुंड महादेव के दिव्य दर्शन जरूर करें।”
यह प्राचीन मंदिर चमोली जिले के घाट विकासखंड (दशोली गढ़) में स्थित है। मंदिर के सामने एक पवित्र कुंड है, जिसका जल भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यही वह पावन स्थान है जहाँ लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हजारों सालों तक कठिन तपस्या की थी। कहते हैं कि अपनी तपस्या के दौरान रावण ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए अपने नौ (या दस) सिरों की आहुति दी थी। इसी वजह से भोलेनाथ ने उसे दर्शन दिए थे। इसी घटना के कारण इस इलाके का नाम ‘दशोली’ भी पड़ा।मंदिर के पास आज भी रावण का एक बड़ा हवन कुंड और ‘रावण शिला’ मौजूद है। कहा जाता है कि इस शिला पर रावण की उंगलियों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। यहां भगवान शिव के स्वयंभू शिवलिंग के साथ-साथ रावण की भी पूजा की जाती है। इस क्षेत्र और मंदिर का ऐतिहासिक वर्णन ‘स्कंद पुराण’ के केदार खंड में ‘दश मलेश्वर’ के नाम से मिलता है।
फागुन महीने की शिवरात्रि और श्रावण मास (सावन) के दौरान इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इन खास मौकों पर मंदिर समिति की ओर से बड़े मेलों और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव नंदीश्वर महाराज के साथ विराजमान हैं। इसके अलावा, मंदिर परिसर में माता दुर्गा, गणेश जी, हनुमान जी और शनिदेव की भी प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। यह मंदिर उन सभी लोगों के लिए एक खास जगह है जो आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करना चाहते हैं। यहां आकर हर कोई शांति और शिव की कृपा महसूस करता है। यह स्थान उत्तराखंड की उन अनमोल धरोहरों में से एक है जो हमें अपनी संस्कृति और पौराणिक कथाओं से जोड़ती हैं।