मुंबई बना वर्ककेशन और रिमोट वर्किंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन, Iwg इंडेक्स में भारत का एकमात्र शहर
मुंबई बना वर्ककेशन और रिमोट वर्किंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन, IWG इंडेक्स में भारत का एकमात्र शहर
NewsPoint•
मुंबई अब सिर्फ पैसों का शहर नहीं, बल्कि काम और आराम का भी नया ठिकाना बन गया है। IWG के एक सर्वे में मुंबई को 'वर्क फ्रॉम एनीवेयर' के लिए दुनिया के टॉप शहरों में जगह मिली है। यह सर्वे बताता है कि लोग अब ऐसी जगहों पर काम करना चाहते हैं जहाँ वे घूम-फिर भी सकें और आराम से अपना काम भी कर सकें। मुंबई ने इस लिस्ट में मियामी और लंदन जैसे बड़े शहरों को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, बैंकॉक, टोक्यो और बार्सिलोना इस लिस्ट में सबसे ऊपर रहे।
यह 'वर्क फ्रॉम एनीवेयर इंडेक्स' उन शहरों को परखता है जहाँ लोग कुछ दिनों या हफ्तों के लिए रुककर काम कर सकें। इसके लिए कई बातों का ध्यान रखा जाता है, जैसे वहाँ का मौसम कैसा है, इंटरनेट कितना तेज़ है, रहने की जगह आसानी से मिलती है या नहीं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट कैसा है, खाने-पीने और वहाँ की संस्कृति कैसी है, काम करने के लिए फ्लेक्सिबल जगहें (जैसे को-वर्किंग स्पेस) हैं या नहीं, और सबसे ज़रूरी, काम और ज़िंदगी के बीच तालमेल कैसा है।मुंबई को इस लिस्ट में शामिल होने की खास वजहें हैं। यहाँ काम करने के लिए एक मज़बूत माहौल है और ऐसी सुविधाएँ भी हैं जो बाहर से आकर काम करने वालों के लिए बहुत काम आती हैं। सबसे पहली बात, यहाँ फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की कोई कमी नहीं है। जो लोग वर्ककेशन पर आते हैं, उन्हें सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि काम करने के लिए अच्छी सुविधाएँ भी चाहिए होती हैं। मुंबई भारत के उन शहरों में से है जहाँ को-वर्किंग और फ्लेक्सिबल ऑफिस बहुत ज़्यादा हैं। यहाँ प्रोफेशनल मीटिंग्स, वीडियो कॉल्स और रोज़मर्रा के ऑफिस के काम के लिए बढ़िया जगहें मिल जाती हैं।
दूसरी बड़ी वजह है मुंबई का पब्लिक ट्रांसपोर्ट। लोकल ट्रेन, मेट्रो और कैब का जाल मुंबई को खास बनाता है। इससे एयरपोर्ट, होटल, सर्विस अपार्टमेंट और वर्कस्पेस के बीच आना-जाना बहुत आसान हो जाता है। जो लोग वर्ककेशन पर आते हैं और रोज़ाना लंबी दूरी तय करते हैं, उनके लिए यह सुविधा बहुत मायने रखती है।
तीसरी अहम बात है लंबे समय तक रहने के लिए अच्छे विकल्प। वर्ककेशन पर आने वाले लोगों की ज़रूरत आम टूरिस्ट से थोड़ी अलग होती है। उन्हें ऐसी जगहें चाहिए जहाँ वे कुछ दिन या हफ़्ते आराम से रह सकें और काम भी कर सकें। मुंबई में सर्विस अपार्टमेंट और काम के हिसाब से कई तरह के रहने के विकल्प मौजूद हैं। यही वजह है कि यह शहर बिज़नेस ट्रैवलर्स और रिमोट वर्कर्स के लिए इतना आकर्षक बना हुआ है।
चौथी वजह है काम के बाद मनोरंजन और लाइफस्टाइल। वर्ककेशन का मतलब सिर्फ लैपटॉप लेकर काम करना नहीं है। इसका एक बड़ा मकसद काम और निजी ज़िंदगी के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी है। मुंबई में समुद्र किनारे घूमने से लेकर तरह-तरह के खाने-पीने, मनोरंजन, कला और नाइटलाइफ के कई विकल्प मौजूद हैं। इससे लोगों को काम के बाद आराम करने और तरोताज़ा होने के भरपूर मौके मिलते हैं।
जब हम दूसरे शहरों से तुलना करते हैं, तो मुंबई एक व्यावहारिक विकल्प साबित होता है। बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और पुणे जैसे शहर बड़े टेक और कॉर्पोरेट हब हैं। लेकिन इन शहरों में ट्रैफिक और लंबा सफर रिमोट वर्कर्स के अनुभव को खराब कर सकता है। मुंबई में भी ट्रैफिक एक समस्या है, लेकिन यहाँ लोकल ट्रेन और मेट्रो का मज़बूत नेटवर्क होने की वजह से कई जगहों के बीच आने-जाने के अच्छे विकल्प मौजूद हैं।
हालांकि, इस वैश्विक सूची में जगह बनाने के बावजूद मुंबई हर मामले में परफेक्ट नहीं है। इसकी सबसे बड़ी कमजोरी डिजिटल कनेक्टिविटी मानी जा रही है। रिमोट वर्कर्स के लिए तेज़ और स्थिर इंटरनेट बहुत ज़रूरी है। IWG के सर्वे में 38% रिमोट वर्कर्स ने कहा कि उनके लिए मज़बूत और भरोसेमंद वाई-फाई सबसे ज़रूरी चीज़ों में से एक है। मुंबई को ब्रॉडबैंड स्पीड और क्वालिटी के मामले में सुधार करने की ज़रूरत है। इसके अलावा, स्थानीय इवेंट्स की संख्या भी एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ शहर और बेहतर कर सकता है।
अब सवाल उठता है कि बेंगलुरु और दिल्ली जैसे शहर पीछे क्यों रह गए? बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और पुणे में शानदार कॉर्पोरेट और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर है। लेकिन 'वर्क फ्रॉम एनीवेयर' के लिए सिर्फ ऑफिस और कंपनियों की संख्या काफी नहीं है। रिमोट वर्कर्स के लिए रहने की जगह, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, मनोरंजन, वर्कस्पेस, इंटरनेट और आने-जाने में लगने वाला समय, ये सब चीज़ें मायने रखती हैं। इन सभी चीज़ों के सही तालमेल में मुंबई ने बाज़ी मारी और वैश्विक इंडेक्स में भारत की ओर से अपनी जगह बनाने में सफल रहा।
कुल मिलाकर, मुंबई की यह उपलब्धि दिखाती है कि भविष्य में किसी शहर की पहचान सिर्फ उसके IT या कॉर्पोरेट हब होने से नहीं होगी। काम करने की सुविधा और बेहतर लाइफस्टाइल का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यह सर्वे इस बात पर ज़ोर देता है कि शहर को सिर्फ आर्थिक केंद्र के तौर पर नहीं, बल्कि रहने और काम करने के लिए एक समग्र (holistic) जगह के तौर पर विकसित करना होगा। मुंबई ने यह साबित कर दिया है कि वह इस नई दुनिया के लिए तैयार है, जहाँ काम और ज़िंदगी का संतुलन सबसे अहम है।
यह सर्वे उन लोगों के लिए एक गाइड की तरह है जो वर्ककेशन या रिमोट वर्किंग के लिए नई जगहें तलाश रहे हैं। मुंबई जैसे शहर, जो काम और आराम दोनों का बेहतरीन मेल पेश करते हैं, भविष्य में और भी लोकप्रिय होंगे। यह दिखाता है कि कैसे शहर अपनी सुविधाओं को बेहतर बनाकर दुनिया भर के टैलेंट को आकर्षित कर सकते हैं। मुंबई की यह रैंकिंग सिर्फ एक शहर की सफलता नहीं, बल्कि भविष्य में काम करने के तरीकों में आ रहे बदलाव का भी संकेत है।